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अद्भुत मानसिक कश्मकश, एक सकारात्मक बाब ये रही, स्नेहाने इस कश्मकशसे बाहर निकलनेकी पहल की..
@1008 धन्यवाद, सही कहा आपने.
क्या सुजाण, इबू को भेजके कोई मालुमात कि जा सकती थी? उनके साथ मे आखिर क्या हुवा ये जाणा जा सकता था क्या. गुरुजी आप सब जाणते है, क्या कहे अब, ज्ञानबाबु ...
बोडा बाबा जैसे सिद्ध पुरुष ने, तपन जैसे कमिन और निच सरभंग के लिये सिर्फ वचन में बंधे होणे के कारण अपने प्राण तक दांव पे लगाये, और एहसान फरामोश तपनसे अ...
आखिर कौशिकीजी समज गयी की आधा अधुरा ग्यान नुकसानदेह हो सकता है, ग्यान हमेशा अपडेट रहना चाहिये बिना गर्व किये. दौंच नागदेव के दर्शन तो एक दिव्य अहसास था...
आज एक नयी जानकारी मिली चोणो के बारे में, शहीद हमेशा वंदनीय होते है, उनका सम्मान अती आवश्यक है, देशसेवा ही धर्म माननेवाले सैनिक हमेशा आदर के पात्र होते...
१८१८ के बादसे मराठा साम्राज्य वैसे भी दुसरे बाजीराव के हाथसे अंग्रेजो के हाथ चला गया था, १८७० की घटना पुरे अंग्रेज काल में घटित हुई, १५० साल बारात सजा...
आज पुन्ह: वाचन का आनंद आया, तावक नाथ जैसा महाप्रबळ सिद्ध, दंभ के कारण सारी शक्ती और प्राण हर बैठा. शक्ती का मद या अहंकार नाश का कारण अवश्य बनता ही है....
नमन राखा के कर्तव्य के प्रती उसकी श्रद्धा को, १०० साल अपने कर्तव्य के प्रती अडीग किसी चट्टान के भांती. साधुवाद और नमन.
तो सारा मिठा दर्द विक्रम और मृदुला की वजहसे था 😉 चलो अंत भला तो सब भला. बहोत ही बढीया संस्मरण गुरुजी.
बहोत दिन बाद यहा आंके एक सुकून सा मिल गया... जय गुरुदेव
