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गुरुजी के संस्मरण
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13/09/2024 2:00 pm
हे कोटाल, आप धन्य हो, हम अधिकांश मानव तो लोभ लालच घृणा काम क्रोध आदि के पुतले मात्र हैँ, ज्यादातर को अपने कर्तावयों का पूर्ण ज्ञान तक नहीं होता है, निभाना तो दूर की बात है, कितने ही मानव अपने माता पिता, बहन भाई के लिए अपने कर्तव्यों से पीछे हट जाते हैँ, आप हो जो माँ के लिए हमेशा सब करने को तत्पर, आप धन्य हो धन्य हो धन्य हो 🌹🌹🙏🏻🌹🌹
श्रीशः उपदंडक reacted
29/01/2025 11:30 am
Wah Kotal Naman hai aapko.
15/06/2026 8:17 am
अद्भुत और दिव्य धन्य वो माँ अंधो और धन्य उसका पुत्र बने हेम कोटाल. साधूवाद
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