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देवधर बाबा जागनेवाले थे इसलिये खेत में ये सारा प्रपंच हो रहा था, वो सब आगे बढ गये सो सब सामान्य होता चला गया. जय हो देवधर बाबा की... साधुवाद
ऐसे विकृत और नीच कर्म करनेवाले बाबाओंका यही हश्र होणा चाहिये, उज्वलने प्यार पाने कि जिदमे नीचतम कर्म अपनाया, आत्मग्लानी और कंचन के धिक्कारवश आत्महत्या...
अद्भुत द्वंद्व, बैजनाथ दंभ के कारण इस हाल पहुंचा, शक्ती का मद कभी नही करणा चाहिये, जितना शक्ती सामर्थ्य उतनी शांती और स्थिरता आती है, बैजनाथ मे उलटा ह...
इन भोंदू बाबाओं जो सजा मिली बिलकुल इससे अधिक के हकदार थे ये लोग, ऐसे लोगोनेही सनातन को बदनाम कर रक्खा है, इनको कर्मोकी सजा तो मीलनी हि थी... साधुवा...
अलौकिक और दिव्यताके बाद वैसेभी कुछ नही शेष रहता.. साधुवाद.
अद्भुत और दिव्य धन्य वो माँ अंधो और धन्य उसका पुत्र बने हेम कोटाल. साधूवाद
अद्भुत मानसिक कश्मकश, एक सकारात्मक बाब ये रही, स्नेहाने इस कश्मकशसे बाहर निकलनेकी पहल की..
@1008 धन्यवाद, सही कहा आपने.
क्या सुजाण, इबू को भेजके कोई मालुमात कि जा सकती थी? उनके साथ मे आखिर क्या हुवा ये जाणा जा सकता था क्या. गुरुजी आप सब जाणते है, क्या कहे अब, ज्ञानबाबु ...
बोडा बाबा जैसे सिद्ध पुरुष ने, तपन जैसे कमिन और निच सरभंग के लिये सिर्फ वचन में बंधे होणे के कारण अपने प्राण तक दांव पे लगाये, और एहसान फरामोश तपनसे अ...
आखिर कौशिकीजी समज गयी की आधा अधुरा ग्यान नुकसानदेह हो सकता है, ग्यान हमेशा अपडेट रहना चाहिये बिना गर्व किये. दौंच नागदेव के दर्शन तो एक दिव्य अहसास था...
आज एक नयी जानकारी मिली चोणो के बारे में, शहीद हमेशा वंदनीय होते है, उनका सम्मान अती आवश्यक है, देशसेवा ही धर्म माननेवाले सैनिक हमेशा आदर के पात्र होते...
१८१८ के बादसे मराठा साम्राज्य वैसे भी दुसरे बाजीराव के हाथसे अंग्रेजो के हाथ चला गया था, १८७० की घटना पुरे अंग्रेज काल में घटित हुई, १५० साल बारात सजा...
आज पुन्ह: वाचन का आनंद आया, तावक नाथ जैसा महाप्रबळ सिद्ध, दंभ के कारण सारी शक्ती और प्राण हर बैठा. शक्ती का मद या अहंकार नाश का कारण अवश्य बनता ही है....
