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रोजगार में दिक्क़त-परेशानी

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श्रीशः उपदंडक
(@1008)
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अल अ'इन अल रहीम!

 

पश्चिम-दिशा की ओर मुख करें! झुके, सर पर कपड़ा रखें, घुटनों पर हाथ रखें, साफ़-सफाई वाली जगह हो, अगरबत्ती तैयार रखें, इक्यावन बार पढ़ें और अगरबत्ती जला दें! गुलाब की अगरबत्ती हो, तो बहुत ही उत्तम!

एक गिलास पानी रख लें, इस पर अब ग्यारह बार दम कर दें, कुछ छींटें वहीँ छिड़क दें, और बाकी पानी, पी जाएँ! बद-नज़र आदि का सर्वनाश हो जाएगा!


   
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(@min)
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प्रणाम गुरुजी ऐसा दिन में कितनी बार करना होगा और सुबह या शाम 🙏


   
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श्रीशः उपदंडक
(@1008)
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Posted by: @min

प्रणाम गुरुजी ऐसा दिन में कितनी बार करना होगा और सुबह या शाम 🙏

एक बार सुबह फिक्स समय ।

 


   
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(@prabhu-lal)
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Guruji... kitne din???


   
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(@manaskumardash53gmail-com)
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Posted by: @1008

अल अ'इन अल रहीम!

 

पश्चिम-दिशा की ओर मुख करें! झुके, सर पर कपड़ा रखें, घुटनों पर हाथ रखें, साफ़-सफाई वाली जगह हो, अगरबत्ती तैयार रखें, इक्यावन बार पढ़ें और अगरबत्ती जला दें! गुलाब की अगरबत्ती हो, तो बहुत ही उत्तम!

एक गिलास पानी रख लें, इस पर अब ग्यारह बार दम कर दें, कुछ छींटें वहीँ छिड़क दें, और बाकी पानी, पी जाएँ! बद-नज़र आदि का सर्वनाश हो जाएगा!

 


   
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(@prashantdhumal)
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प्रणाम गुरुजी,

इतने साल से दुसरोंका सोचके हमेशा उनकी समस्या के बारे में आपसे संपर्क किया, पर आज खुद की समस्या से मजबूर होके आपसे संपर्क करणा पडा, गुरुजी थोडा शुरु से बताता हूँ. हम ५ भाई बहेन. ४ बहिनोमे मै अकेला भाई. जब तक मेरी शादी नही हुई थी तब तक सब ठीक चल रहा था, शादीके बाद ४ महिनोमे ही मेरी बहिनोने घर में इतना कुछ रायता फैला दिया की, मुझे पत्नी समेत घर छोडना पडा. लगबग देढ साल बाहर रहनेके बाद मेरे पहले लडके के जन्म के समय मेरी बडी बहन बीच बचाव करके वापस हमे लेणे आयी. मुझे लगा सब ठीक हो जायेगा पर चीजे कुछ खास नही बदली थी. हमारे पिताजी के नाम कुछ लगभग २ एकर के आसपास जमीन होगी. बहीण और जमाई लोगोंकी पैसो की डिमांड पुरी करते करते अब सिर्फ २८ गुंठा के करीब बची है. पिताजी भी जादातर बेचने के आदी रहे. इसी बीच २००३ में पिताजीने शादी का हॉल स्टार्ट किया. उनके देहांत के बाद २०१३ में वो मेरे जिम्मे आया. बीचमे वो हॉल भी २ no की बहन ने माँ पिताजीके कान भरके हाथीयाने की कोशिश की. उसके लडके ने २ साल हॉल चलाया. बादमे छोटे चाचा और मेरे मामा और मौसी के मिस्टर इन तीनोने पिताजीको समजा बुझाके हॉल मेरे ताबेमें दिया. पिताजीके देहांत के बाद प्रॉब्लेम स्टार्ट हुए. पिताजीने कुछ जगह बेची थी और कुछ सेविंग ये सब मिलाके २०, २१ लाख rs इन २ बहनोने माँ को बहला फुसलाकर निकाल लिये. उसके बाद प्रॉपर्टी झगडा शुरु हुवा. २०१८ को माँ को बहलाकार, उसके नाम की अविभाज्य प्रॉपर्टी बेच डाली. इन सबसे तंग आकार मै पहलेसे बाहर कॉम्प्युटर सेल्स सर्विस का शॉप २०११ में स्टार्ट कर चुका था. मेरा अच्छा तो नही पर ठीक चल रहा था. जब तक ऑफिस बाहर था. २०१८ में ही मेरा शॉप और हॉल ऐसा मिलाके ३०, ००,००० के करीब रिनूएशन पे खर्च हुवा. मुझे ६ महिने ना मिले की जनवरी २० में कोविड आया. जीन लोगोंके adv. लिया था सभीको वापस लौटाया. ३० लाख इन्व्हेस्ट ४ साल हॉल बंद रहनेसे वापस झिरो हो गयी. एक private loan लिया था १० लाख का ४ साल में २२लाख सूत समेट लौटाया. मैने बीचमे छोटे चाचाने घरके लिये रक्खा हुवा एक प्लॉट उनसे खरिदा था, वो बेचके सारा लोन वापस लौटाया. मेरा शॉप जब तक बाहर था तबतक सब ठीक चल रहा था, जबसे यांनी लगभग ८ साल पहले शॉप कार्यालय के primaises में लाया तबसे जेसे बिझिनेस बैठ सा गया. हॉल को भी कोई रिस्पॉन्स नाही. पिछले ८ सालमे लगभग १cr+ गंवा चुका हूँ. समझ नही आ रहा क्या करे. उपरसें कोर्ट केसेस अलग. २ साल पहले हॉल वापस चालु किया पर कोई रिस्पॉन्स नही. गुरुजी आपही कोई उपाय सुझाये...
कोई मार्ग नही दिखा सो आपको लिख रहा हूँ..
 
प्रशांत धुमाळ 
९८५०७३१२७२
 
 
 
This post was modified 3 weeks ago by prashantdhumal

   
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