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महासाधक शंपायन को भूलनेकी भूल बाबा को जीवनभर का दंड दे गयी...
प्रपंची बाबओंका हाल यही होना था कर्म जो ऐसे थे..
अद्भुत और अलौकिक, बाबा लोगोंकी ओछी हरकत ने उन्हे हमेशा के लिये रिक्त कर दिया.. प्रणाम बाबा पुरुक्षा को, मा भवना और माता कामेषी को..
बरसो बरसो का भटकाव मुक्तीसे खत्म हुवा...
घोर मूर्खता और दंभमे अंधा होणा दोनो बाबावोंको जान देकर चुकाना पडा...
बाबा खंज, बाबा भैराल और आखिर तक मार्ग प्रशस्त करते बाबा दरम नमन इन सभी विभूतीयोन्को, अनंत काल के भटकाव और तीलीस्म से सभी को मुक्ती मिल गयी.. साधुवाद
तावक नाथ दंभ और अपने कर्मोसे जानसे हाथ धो बैठा.,
शर्माजी की वजहसे शुमी की हत्या की गुथी सुलज गयी...
सरूप जैसे दृष्टबुद्धी के चक्कर मे आके जोधराज जैसे प्रबळ ओघडने खामखां जान गंवाई, निर्मल मन की एस्टेलाको सरूप जैसोंके चांगुल मे फसनेसे बचा लिया आपने......
चलो अच्छा हुवा बाबा अमराल को आखिर स्थान मिल गया...
प्रबळ लेकीन अधुरा औघड भुंडा बाबा मान गया आखिर मुक्ती के लिये...
कितने गाजी आये, धोलिया को अच्छा सबक मिला.
बाबा केवट को उसके किये की सजा मिल गयी...
सोनीला बाबा एक प्रबळ औघड, जिद छोड दी तो, दुमुक्ष और उरुंगी का मिलन हो गया..
एक और साधना संपूर्ण हुई....
