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गुरुजी के संस्मरण
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Topic starter
17/10/2024 12:16 pm
मैंने जगाया उन्हें!
और फिर वस्त्र पहनाये!
और चल पड़े वापिस!
उस रात वे मेरे कक्ष में ही सोयीं!
मित्रगण!
अगले दिन,
हम लौट आये!
काजल और पूजा,
अभी भी मेरे संपर्क में हैं!
बहुत अच्छी लडकियां हैं वो!
और मैं,
आज भी प्रशस्त हूँ अपने मार्ग पर!
सदैव रहूँगा!
सदैव!
---------------------------साधुवाद!----------------------
29/06/2026 5:58 pm
व्वा बाबा खेडंगनाथ को नमन, ऐसे ही समर्थ गुरुओंकी वजहसे ग्यान की राह आसान होती है. बाबा और कौशान वेताल की प्रश्नोतरी से बचपणमें पढे राजा विक्रम और वेताल की याद आ गयी.
This post was modified 1 month ago 2 times by prashantdhumal
श्रीशः उपदंडक reacted
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