श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

“वो जब बोलेगी तो आप चुप हो जाओगे!” वो बोली, “ऐसा?” मैंने कहा, “हाँ!” बोली पूजा! “हैं काजल?” मैंने पूछा, लरज़ गई वो! आँखें चुरा लीं! “अब क्र...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

“हाँ जी” वे बोले, बत्ती थी नहीं, वही पैट्रोमैक्स जलवाया हुआ था, उसका मैंटेल अब बूढा हो चुका था, बस किसी तरह से सांस ले रहा था! तभी बाहर से व...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

गाजर, मूली, मूली के ताज़ा पत्ते, चुकंदर ले लिए, साफ़ किये, दो प्लेट ली, और दो गिलास, एक जग पानी, और चल दिए कक्ष की ओर! और फिर छीलनी शु...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

और कर लिया भोजन! फिर से आ बैठे अपने कमरे में! सो गए! शाम हुई! छह बजे थे! उठे, बाहर देखा, टपाटप बारिश पड़ ही रही थी! लगता था कि कोई क़सर ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

कमरे में भी अँधेरा पसर गया! और झमाझम बारिश! उस दिन बारिश ने कहर ढा दिया! रुकने का नाम ही न ले! जैसे, ठान रखी थी कि आज तो, कुछ होने ही ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

मुश्किल-बा-मुश्किल अठारह या उन्नीस बरस उम्र होगी उनकी, शायद पहली बार ही किसी क्रिया में बैठ रही थीं, तभी फिर से बिजली कड़की! आकाश जैसे फट पड़ा! ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

वे रुकीं, “हाँ?” उनमे से एक बोली, “कहाँ की हो?” मैंने पूछा, “टिहरी की” वे बोलीं, अब शक्लें दोनों की एक जैसी ही थीं! “दोनों बहनें हो क्या?” म...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

वो चाय तो मदिरा से भी दोगुना आनंददायी थी! बैठ गए! “कहाँ फंस गए!” शर्मा जी बोले, “अब फंस गए तो फंस गए!” मैंने कहा, “क्रिया तो होने से रही” वे ब...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

सुबह हुई साहब! बारिश अब भी पड़ रही थी! बाहर देखा तो हर वस्तु बारिश ने अपनी बना ली थी! बेचारे श्वान भी, जिसको जहां जो जगह मिली, वहीँ घुस गया था!...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

वे दोनों नव-यौवनाएं भाग कर उस पनाहगाह में आ गयीं! और बाबा खेड़ंग नाथ भी आ गए, और फिर सभी चल पड़े वापिस, स्थान की ओर, आज क्रिया टल गयी थी, हाँ,...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के पास की एक घटना

फिर भी, हवा चलती थी तो, पसलियों को चूम लेती थी! और पसलिया रीढ़ की हड्डी पर दस्तक दे मारतीं! वो पनाहगाह बड़ी भी ज़यादा नहीं थी, बस दिन में कभी कोई...

1 year ago
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RE: वर्ष २००९ रुड़की की एक घटना

तब कमिया ने उसको देखा और तब! खून का फव्वारा छूटा उसके मुंह से! इस से पहले दिल्लू कुछ समझता, सर फट गया दिल्लू का! बदन भी फट गया! केवल दिल धड़कता रहा अपन...

1 year ago
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RE: वर्ष २००९ रुड़की की एक घटना

मित्रगण! प्रेम अँधा होता है! साधना भूल गया दिल्लू! प्रेम के आगे हार गया दिल्लू! रो पड़ा बुक्का फाड़कर! रो पड़ा अपनी भुजाओं में कमिया को पाकर! “कमिया! म...

1 year ago
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RE: वर्ष २००९ रुड़की की एक घटना

प्रेम! क्या अनुभूति! यही तो चाहता था दिल्लू! वो और कमिया! बस और कोई नहीं! आंसू छलक गए अब दिल्लू के! खड़ा हुआ! औए नीचे आया! और आके गले लग गया कमिया के! ...

1 year ago
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