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मैं हंस पड़ा! उसको देखा! गम्भीर हो गयी थी! “ऐ? क्या हुआ?” मैंने पूछा, “कुछ नहीं!” वो बोली, “अरे? बताओ तो?” मैंने कहा, “कुछ नहीं” वो बोली, ...
या फिर अभी शुरुआत थी! चलो जी फिर, कर दिया उपकार दारु पर! जीवन सफल हो गया उसका! अब उठाये हमने टुकड़े प्रसाद के, और चबाने लगे! बढ़िया, कुरकुरा...
और हम सब बैठ गए! जैसे रेगिस्तान में खानाबदोश रात्रि समय, अपना डेरा जमा लेते हैं, मानो वैसे ही हम बैठ गए! “बनाओ शर्मा जी” मैंने कहा, उन्होंने...
सूरज अस्त और औघड़ मस्त! मैं और शर्मा जी, आये कमरे से बाहर! बाहर, पानी में कोई बूंदाबांदी नहीं थी! रहम किया था वर्षा ने हम पर! और तभी, गलियारे...
बहुत धन्यवाद! और फिर हमने भोजन कर लिया! बरतन ले गयी वो! और फिर शाम को आने को कहा गयी! “कहाँ बढ़िया था!” शर्मा जी बोले, “हाँ, सच में!” मैंने क...
और फिर आ गईं दोनों! भोजन लायी थीं! रखा उन्होंने भोजन! आलू गोभी की सब्जी! भाई वाह! साथ में अचार! लाजवाब! और रोटियां! भोजन लगा दिया गया!...
एक वो, और एक ये! लेकिन ये! ये विशेष है! ये एक साध्वी है! बाद में ब्रह्म-साध्वी बन जायेगी! किसी ऊंचे औघड़ के समान! आदर, सम्मान! झुक जाये...
मुस्कुरा पड़ी! “अरे काजल? कम बोलती हो क्या?” मैंने पूछा मुस्कुरायी, और बर्तन उठा लिया, और चल पड़ी बाहर! “ये तुम्हारी बहन काजल बहुत अच्छी लड़की ...
उसने ली, और खाना शुरू किया, “पूजा? चाय नहीं पियोगी?” मैंने पूछा, “मैं पी चुकी हूँ” वो बोली, “अच्छा!” मैंने कहा, मजे बाँध दिए! दोनों लड़कियो...
“ज़रूर!” मैंने कहा, और तो ठुमकते हुए चली गयी! और हम बैठ गए! थोड़ी ही देर में, पूजा आ गयी! पूरा लोटा और गिलास लेकर! साथ में काजल भी! खाने क...
बेचारी से उठा भी नहीं! हाँ, कोशिश की! “आज रुक जाओ, अगर मौसम ठीक नहीं हुआ तो हम भी चलेंगे!” वो बोली, चलो जी! ऐसा ही सही! मैंने सामान उठाया, ...
जिन्होंने बुलाया था हमको यहाँ, उनसे बातें कीं, और फिर सामान उठाया अपना अब! विदा ली, और निकल गए! तभी आवाज़ आयी पीछे से, मैं रुका, ये काजल ...
अब तो जैसे, वे विश्राम कर रहे थे! आज निकलना ही बेहतर था! क्रिया अब सम्भव नहीं थी! शर्मा जी भी उठ गए! और फिर मैं स्नान करने चला गया, वापिस आय...
“ऒह..अच्छा” मैंने कहा, फिर से एक और गिलास! और सभी ने पिया! सामान इतना था, कि पेट भर गया! आज तो हो गया भोजन! पूजा भी अब नशे में थी! सो भे...
“अरे वाह! सारा ही उठा लायीं क्या?” मैंने पूछा, “अभी बहुत है वहाँ, आप खाइये!” वो बोली, बैठ गयी! और मैंने गिलास बना दिए! तभी बारिश ने जैसे हमारा...
