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क्या प्रयोजन? अब जो ये कहे कि मुझ से वेताल सिद्ध है, तो समझ लो वो असत्य भाषी है! ये सिद्ध नहीं होता! हाँ कुछ एक वेताल हैं, जो सिद्ध हुआ करते...
या दहाड़ा? कान के पर्दे फटते फटते बचे, बस यूँ मानो! “मैं! कौशान!” वो बोला, ऐसा स्वर की रीढ़ की हड्डी से पसलियां छूट जाएँ! नाभि अंदर ही घुस जाए...
केवल धुंआ ही था वहाँ, धुंए में लिपटा था जैसे वो! हाँ, था ऐसा कि एक लात मारे तो पासपोर्ट और वीज़ा की ज़रुरत ही न पड़े! और अगर अधिक ही तेज पड़ी, तो ...
भूमि जैसे हिल गयी! गोदी में लेने को लपकी हो जैसे! कौशान बहुत भयंकर था! बहुत भयंकर! कि देख ले तो समझो विक्षिप्त ही हो जाए, न भी हो तो, जीवन...
उस सेमल के वृक्ष के नीचे! वो खेल दिखा रहा था! और हम कठपुतलियों की तरह, स्तब्ध थे! नज़रें वहीँ गड़ी थीं! हिले तो मरे, बैठे तो मरे! जैसे थे,...
कभी यहाँ, कभी वहाँ! फिर वो ऊपर उड़ा हवा में लटका! फिर उल्टा हुआ! और अट्ठहास! पेड़ से ऊपर गया! फिर अट्ठहास! कभी सीधो हो, कभी उल्टा! क...
और भूमि तक आ गयी! कलेजा मुंह को आ गया! भय के मारे जड़ मार जाने का डर था बस! और फिर से गर्दन ठीक हो गयी! और फिर से अट्ठहास! और फिर लोप! लेकि...
भयानक अट्ठहास! और जैसे उसको गंध आयी हो, उस साही के मांस की! झपाक से नीचे कूदा! हम तो बौने लग रहे थे उसके सामने! मैं उसके घुटने तक ही आता! ...
अब बाबा आगे बढ़े! और वेताल नीचे हुआ! कलाबाजी खायी, और सीधा हुआ! अब देखा उसका खौफनाक चेहरा! जिस्म! चेहरा इतना चौड़ा जैसे किसी सिंह का! आँखे...
यदि ये क्रुद्ध हो जाए, तो समस्त विद्यायों का नाश करता है! याददाश्त को मिटा देता है! व्यक्ति ज़िंदा लाश बन घूमता है, और सीधा फिर मृत्योपरांत, ...
घूमते हुए था वो धुआं! और जैसे ही धुंआ छंटा! ऊपर, बहुत ऊपर, करीब बीस-पच्चीस फीट ऊपर, कोई लटका दिखा! साँसें अटक गयीं! प्रकाश से नहाया हुआ ...
शरीर ऐसे कांपने लगा जैसे भीगा हुआ कोई श्वान! दांत ऐसे कटकटाने लगे जैसे नंगे बदन बर्फ में लेट गया हूँ मैं! जिव्हा ने हलक में जाकर पनाह ले ली! घ्र...
कौशान को आज पहली बार देखने वाला था मैं, इसीलिए आया था यहाँ, देखने और सीखने! बस, यही दो कारण थे! तभी पेड़ खड़का!! जैसे किसी ने हिलाया हो उसे!...
और वो पेड़ एकदम सफ़ेद रंग सा चमक रहा था! जैसे हिम जमी हो उसके पत्तों पर, शाखों पर! समय रुक गया था! श्मशान में मौजूद सभी अशरीरी भाग छूटे थे, पनाह...
बाबा झुक गए! हम भी झुक गए! तभी वहाँ, उस पेड़ को, एक सफ़ेद से धुंए ने घेर लिया! जैसे कि घना कोहरा! सबकी साँसें अटकीं अब! ये आमद थी! महा-भ...
