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और वो खोदता रहा, तभी उसकी गैंती किसी वस्तु से टकराई! और गैंती फिसल गयी! वो रुक गया!"क्या मिला?" पूछा जोगन ने,"रुक जा!" बोला वो,और फिर से एक मंत्र पढ़ा,...
ये वो ही जगह थी जहां से राधा ने दूब की घास उखाड़ी थी! बाबा अब बैठ गया था उधर, हाथ नहीं लगाया था उसने, बस देख ही रहा था!"क्या है इधर?" बोली जोगन!"रुक?" ...
और अगर सच ही पूछो तो, राधा की माँ को कुछ बात समझ में आया और कुछ नहीं, जो समझ में आयी वो ये कि उसका ब्याह हो जाए तो इस समस्या से निबटारा मिल जाए!"बाबा...
"कौन है तू?" पूछा बाबा ने,"राधा!" बोली वो,और उठ खड़ी हुई, एक कड़वी नज़र से बाबा को देखा, फिर उस जोगन को, उठी और अपने माथे और भौं से गेंदे के फूलों के किल...
"चल तो सही?" बोली माँ,"कहां?" पूछा उसने,"मंदिर में!" बोली माँ,"किसलिए?" पूछा उसने,"कोई आया है!" बोली वो,"कौन?" पूछा उसने,"तेरा भाग अच्छा है!" बोली माँ...
बैलगाड़ी थोड़ा आगे बढ़ी और एक जगह जा आकर रुकी! वहां खेत में कुछ लोग धान ऊगा रहे थे, बुलाया एक आदमी को, आदमी आया और उस से बात हुई, उस आदमी ने आगे जाने को ...
राधा! बेचारी! एक भोली-भाली गांव की लड़की! रूप एवं यौवन से भरपूर! जीवन के नए भिवष्य को लेकर, रोमांचित, जैसा अक्सर उसकी उम्र की लड़कियां रहा करती हैं! परन...
"हां राधा!" बोली वो,"तो चल न?" बोली राधा,"मैं स्वयं आउंगी!" बोली वो,"कब?" पूछा मैंने,"जब भी मेरा मन करे!" बोली वो,"अब नहीं है?" बोली राधा,"अभी तो जाना...
"नहीं माँ!" बोली वो,"क्या?" माँ ने अचरज से पूछा,"हां!" बोली वो,और वहीँ बैठ गयी!"क्या कह रही है तू?" बोली माँ,"हां, सच कह रही हूं!" बोली वो,"बड़े घर का ...
"मेरे घर चलोगी?" पूछा राधा ने,"किसलिए राधा?" बोली वो,"माँ खुश होगी तुझे देख कर!" बोली राधा,"राधा, वो देखो, लोग लौटने लगे, मुझे भी जाना है!" बोली वो,"क...
"हां!" बोली राधा,और एक करौंदा और तोड़ के, साफ़ कर के, दे दिया उसे! उस लड़की ने झट से पकड़ लिया और काटा उसका टुकड़ा!"तेरे यहां नहीं मिलते ये?" बोली राधा,"नह...
"अर्थ?" बोली राधा,"सच्चाई!" बोली माँ,"ओह! समझी!" बोली वो,"अब तू ये बता..?" बोली माँ,"क्या?" पूछा उसने,"तू सोयेगी या काम करेगी?" बोली माँ,"काम!" बोली व...
बाहर जैसे ही आ कर देखा! आंधी तो छोड़ो, हवा भी नहीं! नमी थी, गर्मी और उमस! आंधी कहां से आयी? वो जामुन का पेड़? वो तो हिल रहा था? और वो, पीपल के पेड़? उनके...
"कैसी देर बाबा?" पूछा उसने,"देख!" बोला वो,और किया उस मूर्ति का चेहरा उसकी तरफ! अब तक रही खूबसूरत मूर्ति, उसका चेहरा, अब कालिख समान था, कुरूप!"ये क्या?...
तो माँ बेटी लौट आयीं घर, घर आ कर, सोने की तैयारी की, माँ के कमरे में ही सोती थी, लेकिन आजकल, उसे नींद नहीं आती थी, नींद जैसे वो कांटा निकालने वाला अपन...
