श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

"रात को आ, आठ बजे" बोले वो, मेरे सर पर हाथ फेर,"जी, जैसा आदेश!" बोला मैं,खड़ा हुआ और उनके चरणों में सर रखा, आशीर्वाद लिया, और चल पड़ा बाहर! आ गया सीधे उ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

करीब आधे घण्टे के बाद नन्दू आया, साथ में, किसी को ला रहा था, चाय बनवा लाया था, साथ में कुछ ताज़ा सा हलवा था, सूजी का! उस रोज कोई पूजन था वहां, ऐसा ही ल...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

रात्रि-समय हम काशी पहुंचे, मैंने इत्तिला कर ही दी थी, काशी से अब आगे जाना था थोड़ा, तो वहाँ से सवारी पकड़ी, तय किया भाड़ा और फिर चल पड़े! हम रात में पहुंच...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

ब्रह्म जी हमें वहीँ मिले, सामान देखा उन्होंने हमारे हाथों में तो चेहरे की रंगत सी उडी! खाली मिज़ाज़ से ही हमारा प्रणाम स्वीकार किया उन्होंने! और जीवेश क...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

वो दिन तो पूरा बीत, कोई खबर नहीं आयी! चूँकि द्वन्द की चुनौती इस तपन नाथ की थी, अतः, उसकी चुनौती को स्वीकार करना हमारा उद्देश्य ही था! अब या तो चुनौती ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

"क्या होगा?" बोला जीवेश,"हाँ, पता नहीं" बोले वो,"कुछ नहीं होगा!" कहा मैंने,"पता नहीं" बोले वो,"आप मानते क्यों नहीं?" कहा मैंने,"क्योंकि आप जानते नहीं"...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

मैं भी लेट गया था, उस प्यारी सी हवा में खुमारी भरी थी, जी कर रहा था कि लम्बे पाँव पसार, बस वहीँ ज़रा ले लूँ दो-चार झपकियां! खैर, झेली वो हवा भी! दरअसल,...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

"विनोद?" कहा मैंने,"हाँ जी?" बोला वो,"आ जा, ले ले तू भी?" कहा मैंने,"आप लो जी!" बोला वो,"क्या बात है?" पूछा जीवेश ने,"वो हैं न दो चार साथ!" बोला वो,"अ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

"आपको तभी मैंने समझाया था, मैं जानता था, असल में द्वन्द ये तपन नाथ नहीं, बाबा बोड़ा ही लड़ते हैं!" बोले ब्रह्म जी,अब जीवेश बाहर आया अपनी उलझन से, और एक ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

हम दोनों बाहर आ गए थे, और माला के आने का इंतज़ार कर रहे थे, वो आती तो हम चल पड़ते! कुछ ही देर में माला आयी, और हमसे बात की, उसने बताया कि उसको वहीँ कुछ ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

"समझे?" बोले वो,"हाँ!" कहा मैंने,"क्या?" बोले वो,"यही, कि इतनी सरलता से तो प्राण सौंपे नहीं जाएंगे!" बोला मैं,मेरी बात सुन, वे मुस्कुरा पड़े!"तो बाबा?"...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

मैंने और जीवेश ने जल का गिलास उठाया और जल पिया! कन्या ले गयी गिलास वापिस, अचानक से कुछ महक सी उठी, देखा तो धूपदान में, वही कन्या चूर्ण डाल गयी थी, ये ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

हमको वो माला, ले चली एक जगह, ये जगह बड़ी ही शान्त सी थी! उपले पड़े थे वहां पर, कुछ चारा भी रखा था, शायद कोई गाय आदि यहां बंधती होंगी, कुछ छीकड़े भी पड़े थ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

यहां आसपास मन्दिर ही मन्दिर थे! दूर दूर तक, जहां तक देखो! आस्था से परिपूर्ण स्थल था ये! कोई भी जगह ऐसी न थी, जहां कोई मूर्ति या कोई छोटा सा मन्दिर न ब...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

ठीक कोई सात बजे, हम ब्रह्म जी के पास गए, वे किसी के साथ बैठे हुए थे, हमें इशारा किया रुकने का, तो हम बाहर आ गए और खड़े हो गए! बाहर पूजन का समय था, मन्द...

2 years ago
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