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वे दोनों अपना सा मुंह लटकाए चले गए थे, अब वो दो की चार और चार की सोलह बताकर, आगे परोसते! हमें कोई चिंता नहीं थी, यदि ये बाबा बोड़ा, न्यायप्रिय होंगे तो...
हम उठने को हुए, और चलने लगे बाहर! कि बाहर दो आदमी दिखाई दिए, सीना तान कर चलते हुए, गले में मोटे मोटे से, गलबूटे धारण किये, आ गए दरवाज़े था, रुक गए वहीँ...
हम करीब पौने घण्टे वहां रहे, यही सब बातें होती रहीं, और फिर हम लौट पड़े! गर्मी सी लगने लगी थी, तो मैं तो हाथ-मुंह धोने चला गया था! जीवेश भी अपने ताऊ जी...
उस रात हम बातें करते करते, कुछ अटकलें लगाते हुआ, सो गए, भोजन कर ही लिया था, नींद बेहद अच्छी आयी! ये कक्ष ज़रा बाहर की तरफ बना था, हवा सीधी अंदर ही आती ...
"बोड़ा?" बोला जीवेश!"हाँ, बोड़ा बाबा!" कहा मैंने,"कभी नहीं सुना ये नाम!" बोला वो,"मैंने भी कभी नहीं सुना!" कहा मैंने,"अजीब सी बात नहीं?" बोला वो,"क्या अ...
"उन्हें आत्म-संज्ञान हो उठता है, यही न?" पूछा मैंने,"हाँ, यही आशय है मेरा!" बोले वो,"तो ये बन्धन हुआ! इसका अर्थ हुआ, कि ये सरभंग इन बाबा का अवश्य ही श...
"सत्यानाश हो गया अब!" बोले वो, सर पर हाथ मारते हुए!"क्यों?" पूछा मैंने,"तुम उसे नहीं जानते!" बोले वो,"जान गया हूँ!" बोला मैं,"क्या?" पूछा उन्होंने,"खो...
"आ जाओ!" बोले ब्रह्म जी,और आँखों से इशारा किया कि उनकी बात सुनें हम! हम समझ ही गए थे, खैर, देखते अभी कि करना क्या था! वो खब्ती इंसान यहां बैठा था, अब ...
"ब्रह्म जी बता देंगे!" बोला वो,ब्रह्म जी, अर्थात, ताऊ जी जीवेश के!"अच्छा, तो ठीक है!" बोला जीवेश,"ये ले विनोद!" बोला जीवेश, कुछ पैसे देते हुए उसे,"हैं...
"एक काम हो सकता है?" पूछा मैंने,"क्या?" बोला वो,"इस आदमी की पकड़ क्या होगी, पता लगाया जा सकता है?'' पूछा मैंने,"हाँ" बोला वो,"किस से?" पूछा मैंने,"ताऊ ...
"हाँ जी?" कहा मैंने,"ये आदमी बिगड़ैल है बहुत!" बोले वो,"तो?" कहा मैंने,"बदमाश आदमी है" बोले वो,"अच्छा, तो चुप हो जाएँ हम?" बोला मैं,"हाँ, यही बेहतर है!...
"अब अगर कुछ बोला वो तो इसे सबक सिखा कर ही छोड़ूंगा!" बोला वो,"सबक तो बनता भी है!" कहा मैंने,"देखते हैं!" बोला वो,हमने पानी पिया और फिर कमरे में ही आ बै...
ऐसे खब्ती इंसानों की बुद्धि, दरअसल, एक राह वाली ही होती है, मतलब एक ही दिशा में सोचते हैं ऐसे लोग, न परिणाम ही देखते हैं, न देखना ही चाहते हैं, कोई उन...
बाहर शोर गूंजा! कुछ गाली-गलौज सी होने लगी! साफ़ था, वो लौट आया है, उसे उसके खोखले मान पर, चोट बर्दाश्त नहीं हुई थी! खैर, अब तो यहां भी सभी मुस्तैद ही थ...
"हाँ?" बोला जीवेश!"सिखाऊं ज्ञान?" बोला वो,"तू सिखाएगा?" बोला वो,"बोले तो अभी!" बोला वो,"तो उन ले, चाहे हो कुछ भी, तेरी गर्दन उतार दूंगा यहीं!" बोला वो...
