श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

तो हम वापिस आ गए! जगह का निर्धारण हो चुका था, अब कुछ सामान आदि की व्यवस्था की जानी थी, तपन नाथ सरभंग था, वो अपनी सरभंग-क्रिया को बलशाली करने हेतु, अथक...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

"आ जाओ!" बोला वो,"चलो!" कहा मैंने,चल दिए हम पीछे पीछे उसके, वो हमें अजीब सी जगह से ले जाते हुए, एक श्मशान में ले आया, एक भी चिता नहीं जल रही थी, हाँ, ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

उस बीयाबान में चलती गाड़ी की आवाज़ गूँज रही थी! पीछे मिट्टी उड़ने लगी थी! रास्ता भी साफ़ था, ऐसा तो नहीं कहूंगा मैं, एक तो गाड़ी हिल रही थी, अंदर, वो सीट ह...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

ठीक ग्यारह बजे हम आ गए ब्रह्म जी के पास, ब्रह्म जी के साथ एक और आदमी बैठा था, उस से भी नमस्कार हुई!"ये करवाएंगे प्रबन्ध!" बोले ब्रह्म जी,"अच्छा! बहुत ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

जीवेश सो गया था सो मैं भी सो गया! अब इत्मीनान से सोना था, अब मन में कोई चिंता भी नहीं थीं! खैर, नींद आयी और सो गए हम!प्रातःकाल में फारिग हो, चाय-नाश्त...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

उन्होंने पोटली ली, और खोल ली, उसमे से कुछ निकाला, ये भी एक पोटली में था, उन्होंने उसे भी खोल और दो बाजू-बन्ध निकाल लिए! उनको माथे से लगाया और पोटली पी...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

नदी में उस समय, जल थोड़ा कम था, हाँ, मध्य में तो गंगा जी का बहाव बेहद ही तेज था! कोई छोटी नाव उसे पार नहीं कर सकती थी! बहा ही ले जाती उसे! यहां गंगा जी...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

रात को भोजन किया और कुछ बातें होती रहीं! और फिर सोने चले गए! प्रातः काल में, स्नानादि से निवृत हो, उसी ध्यान-स्थान पर चले गए! यहां दीप चलाये गए थे और ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

आज्ञा ले, निर्देश ले, हम लौट पड़े वहाँ से! आ गए अपने कक्ष में! आज तो एक अलग सी ही प्रसन्नता थी! जी कर रहा था कि बस, अब सामने वो तपन नाथ हो, और आरम्भ हो...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

अब हमें यहां ध्यान लगाना था! पहले दीप जलाए हमने, गुरु-आज्ञा ली मन ही मन, उनका आशीष मिले, कामना की, और गुरु-नमन करते हुए, ध्यान में बैठ गए! ध्यान करते ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

"जीवेश?" कहा मैंने,"हाँ?" बोला वो,"इस तपन नाथ का मैं क्या हाल करूँगा, ये तो तुम देख ही लोगे! लेकिन, दुनिया उसको देखेगी, सुनेगी और थू करेगी उसके नाम पर...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

वे चले गए थे! आदेश हो चुका था! अब बस पालन होना था! मुझे सुबह, जीवेश के संग, प्रातः ही, स्नान कर, उस क्रिया-स्थल में पहुँच जाना था, का का हमारा सारा प्...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

और तब बजे पौने आठ! अब जाना था हमें उनके पास! पहले उनके पास, फिर उनका आदेश, जो कहें, जैसा कहें! नन्दू आ गया था हमारे पास, कुछ भुने हुए चने चबा रहा था, ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

"उधर देखो?" कहा मैंने,"कहाँ?" बोला वो,"उधर? उन खभों के साथ?" कहा मैंने,"टूटा-फूटा सा स्थान है कोई?" बोला वो,"हाँ, अब तो टूटा-फूटा है!" कहा मैंने,"पहले...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११, बोड़ा! एक महान औघड़!

अब पेट भर गया था! आज तो ऐसा खाया था कि जैसे, पता नहीं कब का भूख होऊं! सच भी है, चमचमाती स्टील की बढ़िया थाली, अपने घर की, गद्दे पड़ी पीतल की थाली में अब...

2 years ago
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