Last seen: May 12, 2026
अचानक से मेरे कानों में गड़गड़ाहट सी हुई! मैंने झट से देख लगाई! उधर देखा, भोग दिया जाने वाला था, थाल सजा दिए गए थे, त्रिखण्डा का आगमन होने को था! मैं तभ...
अब मैंने कौमुंडी का आह्वान आरम्भ किया! एक मन्त्र पूरा होता तो भोग देता! ये महा-साधना होती है! इसका साधना का विधान सरल नहीं! इसकी साधना, इकतालीस दिन की...
तो 'हंसाई' हो ही गयी थी! उसने थाप दे, मुझे ये चेताया था कि अभी भी समय है, जो वो चाहता है, यदि मैं उसे स्वीकार कर लूँ तो! मैंने भी थाप का उत्तर दे दिया...
देख लड़ी और देख पकड़ी गयी! देख पकड़ना आवश्यक ही होता है! इस से पता चलता रहता है! जो देख मेरी पकड़ी गयी थी, उसमे कोई स्वर न थे, ये मात्र देख ही होती है, श्...
उस थाली में, कुछ मांस और फिर मदिरा उड़ेल दी! हंसी कभी यहां गूंजे, कभी वहां गूंजे! मैंने तैयार कर ली थी थाली, उठा मैं और उस थाली को ले, दक्षिण की तरफ चल...
तो मैं और जीवेश उस स्थान पर आ गए थे, यहां आकर, उस अलख-स्थान को नमन किया! कुछ सामान हमारे पास लाया गया था, वो मैंने वहीँ रखवा लिया था! अलख का ये स्थान,...
"जीवेश?" बोला मैं,"हाँ?" कहा उसने,"आओ ज़रा?" कहा मैंने,"चलो?" बोला वो,"हाँ, आओ!" कहा मैंने,हम चल दिए अपने स्थान की तरफ, यहां का ज़रा जायज़ लेना था, ये, त...
कक्ष तक पहुंचे, दरवाज़ा नहीं था उसमे, एक लोहे की चौखट लगी थी, प्लास्टर भी नहीं था, ईंटों में टीप भरी गयी थी, लेकिन कक्ष साफ़-सुथरा था, आसपास फूलों के पौ...
उस दिन एक बजे करीब मैंने, विद्याओं का संचरण कर लिया था, जीवेश ने नहीं किया था, उसे कुछ कमी लगती थी अपने निर्णय पर, वो मेरे कहे अनुसार ही ये संचालन करत...
"ब्रह्म जी! मानता हूँ आपकी चिंता करने का आपके पास उचित कारण है! और ये भी कि आप नहीं चाहते कि हमारा कुछ बुरा ही हो! परन्तु, अब चूँकि मैं कोई सिद्धहस्त ...
रात को हमने कुछ नहीं किया था, अगली रात ही बहुत कुछ करना था, कल की सुबह से शाम तक, बस तैयारियां ही थीं, छह बजे करीब हमें उस स्थान पर भी पहुँच जाना था, ...
तो हम कमरे में आ गए, अपने बैग्स निकाल लिए, बैग में कुछ सामान था और कुछ यहां से लेना था, ये ऐसा सामान होता है कि इसको ले जाकर, साथ नहीं, ले जाया जा सकत...
तो हम लौट आये वापिस, उनसे हमने क्रिया-स्थल का ताला खुलवा लिया था, ये लंबा-चौड़ा सा स्थान था, यहां मिट्टी से लीपा हुआ था, आंगन भी, ये मिट्टी का बना ही क...
"एक बार फिर भी, देख लेना!" बोले वो,"हाँ, अवश्य ही!" कहा मैंने,"और कोई सेवा हो, तो बताइये?" बोले वो,"और कुछ नहीं, शेष आप जानते ही हो!" कहा मैंने,"वो सब...
पीछे देखा, तो ब्रह्म जी थे! कमाल की बात थी! वे यहां तक चले आये थे! शायद कुछ कहना या सुनना बाकी रह गया हो!"आइये!" कहा मैंने,"आ रहा हूँ!" बोले वो,आ गए अ...
