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सारा खुमार और नशा काफ़ूर हो गया था! सात का समय था! जब हम उठे तब कॉफ़ी मंगवाई गयी और हमने कॉफ़ी पी! रात के समय यहां का माहौल बड़ा ही खुशगवार सा हो जाता था!...
हमने बीयर्स का भरपूर आनंद लिया! वहां कुछ विदेशी पर्यटक भी मौजूद थे, वे भी सभी वहां मजे ही ले रहे थे, लेकिन यहां मुझे, गांजे की महक़ आ रही थी, अवश्य ही ...
तो हम चारों घूमने निकल पड़े! यहां के छोटे छोटे मंदिर, आशीर्वादों की खान कहे जाते हैं, कुछ ऐसे देवी एवं देवतायें हैं, जिनके बारे में मुख्यधारा में प्रचल...
"ये नहीं माने!" बोले शहरयार जी!"अब बता भी दो उसे?" कहा मैंने,"ये सब जाने है!" बोले वो,"उसने पूछा, आप जवाब दो?" कहा मैंने,"क्या पूछा? हैं बे?" बोले वो,...
"हां दीपक, लाओ!" कहा मैंने,उसने पानी दिया, मैंने बोतल खोली पानी की, और चार-पांच घूंट पानी गटक लिया, फिर सभी ने थोड़ा थोड़ा पानी पिया!"छत पर क्या है?" पू...
अंदर आये तो सीढ़ी चढ़े! मैंने नीचे बने हुए कमरों को देखा था, फिलहाल में तो ताला लगा था और हम, वहां नहीं ठहरने वाले थे, ये पक्का था!"नीचे क्या है?" पूछा ...
"शहरयार जी?" कहा मैंने,"जी? हुकुम?" बोले वो,"बात तो सही ही कही नीरज ने!" कहा मैंने,"मिल वाली?" बोले वो,"हां, अब मिल न सही, कुछ न कुछ तो है ही!" कहा मै...
तो दूसरी बोतल भी मंगवा ली गयी! तभी अचानक से एक बात मेरे मन में खटक सी गयी! लेकिन मैंने पूछी नहीं, मैं स्वयं ही देखना चाहता था, देखूं कि क्या वैसा है भ...
"लीना घर पर ही है?" पूछा शहरयार ने,"हां!" बोला वो,"सबसे पहले उस से बात न की जाए?" बोले मुझे देखते हुए,"सुझाव अच्छा है!" कहा मैंने,"क्या कहते हो?" पूछा...
मैंने गिलास उठाया और दो घूंट पिए, दो आइस-क्यूब और डाल लिए थे, हिलाया गिलास, बर्फ के टुकड़े गिलास की दीवार से टकराये और एक मधुर ही आवाज़ हुई! मैं अभी उस ...
"जी साहब?" बोला वो,"तूने बताया था न कि एक रात तूने कुछ देखा था?" पूछा उस से राजन ने,"हां जी!" बोला वो,"क्या देखा था, इनको बता, ये गुरु जी हैं!" बोला र...
"मैं तो हर बार ही खता हूं!" बोला नीरज,"टर्की खाय भये तबहि ठरकी!" बोले शहरयार!मेरी हंसी निकल आयी, फिर वे सब हंसे!"गुरु जी?" बोला राजन,"हां?" कहा मैंने,...
"हमने तो ये ही सुनी है कि करत करत अभ्यास ते, जड़मति होत सुजान?" कहा मैंने,मैंने ये बात कही कि हंसी के गुब्बारे से फूट पड़े! सभी हंसने लगे, शहरयार भी!"जड़...
हम बाहर आये और फिर डाइनिंग-रूम में ले आये हमें वे! हम बैठ गए, मैंने पहले पाने पिया थोड़ा सा और फिर, सामने रखे, व्यंजनों की तरफ देखा, सलाद से लेकर, बढ़िय...
बात सही थी, इंसान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है, अपने घर में आग नहीं बर्दाश्त कर सकता! अब उसका प्रेम-विवाह था, ज़ाहिर था, इतना समृद्ध होते हुए भी वो एक मध...
