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"फिर क्या हुआ विक्रम?" पूछा मैंने,"फिर?'' बोला वो,"हां?" कहा मैंने,"हम अक्सर यहां आते थे, लेकिन इस जगह हम, उस दिने पहली बार आये!" बोला वो,"तब?" पूछा म...
"मुझे नहीं पता कि शोभित वहां है या नहीं, चूंकि मैंने देखा नहीं!" कहा मैंने,"मैं ढूंढ लूंगा!" बोला वो!"ये अच्छा रहेगा!" कहा मैंने,"हां! फिर घर!" बोला व...
तभी मेरे दिमाग में एक ख़याल आया! ये कब से हैं, इन्हें पता नहीं! दिन याद है, शनिवार! लेकिन..."विक्रम?" कहा मैंने,"हां?" बोला वो,"ये साल कौन सा है?'' पूछ...
"विक्रम?" कहा मैंने,"हां?" बोला वो,"और कौन है यहां?" पूछा मैंने,"हम दो!" बोला वो,"लेकिन, लगता है. चार और हैं?" पूछा मैंने,"वो?" बोला वो,"हां?" कहा मैं...
"विक्रम, कुछ याद है?'' पूछा मैंने,"हां!" बोला वो,"क्या?" बोला मैं,"ये, मेरी प्रेमिका!" बोला वो,"मृदुला?" कहा मैंने,"हां!" बोला वो,"मृदुला?" कहा मैंने,...
"कौन हो तुम?" पूछा मैंने,उसने एक बार अपनी प्रेयसी को देखा! घबरा गया था!"घबराओ नहीं!" कहा मैंने,"क्यों आये हो?" बोला वो,"इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता!" कहा...
वहां जो कोई भी था, अब भाग गया था, उन्हें शायद पकड़े जाने का डर लगा था, और जो गठरी वहां फेंकी गयी थी, उसमे महज़ कुछ चीथड़ों के अलावा कुछ भी न था! वो भाग र...
सामने टूटे हुए खंडहर थे! जैसे कभी कमरे रहे हों उधर, अब चूंकि ये अनाजघर था, तब तो शायद यहां गांवों से अनाज आता होगा और उनका वितरण भी होता होगा! कल की च...
अब बात ये थी कि इंतज़ार कैसे हो? सुबह आये तो अब सारे काम आगे बढ़ें! वैसे ऐसी बहुत सी जगहें आज भी हे, जो इतिहास को जोड़े रखती हैं वर्तमान से! ये धोजी भी ए...
तो इसका मतलब हुआ कि वो रोशन, उस धोजी के पास का ही रहने वाला होगा, अब वो प्रेत था, वहीँ भटकता था, ये प्रेत एक रास्ते से आते जाते हैं कभी वो गाड़ी टकराई...
वो चला गया और मैं लौट आया! मेरा इंतज़ार कर रहे थे वे दोनों ही, नीरज को थोड़ा सा भय लग रहा था, उसने ऐसी स्थिति कभी देखी न थी इसीलिए!"नीरज?" कहा मैंने,"जी...
"सुनो! मुझे मज़बूर मत करो, नहीं तो तुम जानते नहीं कि क्या होगा, सामने आओ, कष्ट नहीं पहुंचाऊंगा, मुझे बताओ, मैं यक़ीन करूंगा!" कहा मैंने,"नहीं!" आयी एक म...
अब मेरा दिमाग, ज़रा शातिर सा होने लगा था, आवाज़ तो मैंने सुनी ही थी, अब चाहे वो हो कोई भी, इसका मतलब साफ़ था, कि यहां कोई न कोई है तो ज़रूर ही! अब क्या कि...
मैं उठ कर ज़रा खिड़की की तरफ चला, पर्दा हटाया और नीचे देखा, यहां अंधेरा इतना घना नहीं था, दरअसल, कुछ लैम्पोस्ट की रौशनी वहां तक पहुंच पा रही थी, मैंने ख...
उसने बीयर निबटायी और बैठ गयी, पास ही, मेरा, सच पूछो तो उसमे कोई ध्यान ही नहीं था, मैं यही सोच रहा था कि आज की रात कुछ तो ऐसा हो, जिसका कुछ सूत्र मेरे ...
