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राजन दौड़ता हुआ आया, नीचे हमें देखते ही! प्रणाम हुई और फिर हमें ले चला वो साथ अपने, लकड़ी की बढ़िया सी सीढ़ियां बनी थीं, लकड़ियां ही थीं, मुझे तो यही लगा, ...
रात को, हम एक जगह रुके, थोड़ी देर, मुरादाबाद में, थोड़ा आराम किया और फिर से चल पड़े! अब जगह शांत थी, रात का अंधेरा छाया ही हुआ था, नींद भी आ गयी! गाड़ी बी...
तो इस तरह हम बातें करते करते, नींद के आग़ोश में चले गए! फन्ना के सोये हम फिर! सुबह नींद खुली जल्दी ही, और नीरज जी को जगाया, हाथ-मुंह धोये, कुल्लादि कर ...
तो साहब, हम रात वहीँ रुक गए, खाना आदि भी हो गया था, अब नशे की झोंक थी तो अब सो जाना ही बेहतर था, बाहर बारिश अच्छी पड़ रही थी! खैर, हमारी बातचीत फिर भी ...
"ये तो सच में ही समस्या है!" बोला मैं,"अरे गुरु जी?" कहा उन्होंने,"जी?" कहा मैंने,"चलो एक बार तो देखी जाए!" बोले वो,और सलामी का टुकड़ा तोड़ा, चटनी से ल...
"खैर, वहां जो कुछ भी है, उसकी कुछ न कुछ वजह तो है ही!" कहा मैंने,"अब सो तो है ही?" बोले शहरयार जी,"क्या वजह हो सकती है?" बोले नीरज,"ये तो आप बेहतर बता...
"जी?'' बोली वो,"मेरा मतलब, अभी तो समय है नहीं!" बोले वो,"बाद में कब?" बोले नीरज,"हफ्ता तो दीजिये, फिर बताता हूं!" बोले वो,"एक हफ्ता?" बोले वो,"अरे? तो...
"तो उस रात भी एक गार्ड ड्यूटी पर था!" बोली वो,"समझ गया!" कहा मैंने,"हम आ जाएं?" बोले शहरयार!"हां, आ जाइये!" कहा मैंने,वे अब बैठ गए थे, मेरा दिमाग अभी ...
''कोई विश्वास वाली?" कहा मैंने,"पूरी कोशिश!" बोले वो!"ठीक!" कहा मैंने,"भेजूं मैरी को?" बोला वो,"अरे हां! कुछ बताने वाली थीं मुझे वो!" कहा मैंने,"जी, अ...
"आप ज़रा नीरज को भेज दें यहां, अगर बुरा न लगे तो?" कहा मैंने,"बुरा कैसे सर, अभी लीजिये!" बोली वो,और इठलाते हुए, अपने कपड़े ठीक करते हुए, चली गयी बाहर, ब...
"चूंकि आप अभी मेरे समक्ष हैं, अतः आपसे प्रश्न करना उचित भी है और इस से मुझे भी मदद मिलेगी, उम्मीद है, आप बिन संकोच के मेरे प्रश्नों का उत्तर दोगी?'' क...
बाल-बच्चा, ये मैंने जानबूझकर ही पूछा था, मुझे तो कोई समस्या नहीं लगती थी अभी तक, अक्सर ऐसा तो होता ही रहता है, कभी कभी व्यवहार में बदलाव आ ही जाता है,...
मैरी ने धीमे से कुछ कहा नीरज से, कुछ ज़्यादा ही धीमे से बोलै था, आवाज़ ज़रा सी भी इधर-उधर नहीं गयी! खैर, होगी कोई तिजारती बात, अब सौ बातें होती हे, कुछ त...
"हैं? अभी से झंडा डाउन?" बोले वो,"और क्या!" बोले वो,"ये तो कोई बात न हुई?" बोले वो,"आज़ादी मिल गयी, वन्दे मातरम्!" बोले वो,"वन्दे मातरम् साहब!" कहा मैं...
बाहर बिजली कड़की और अंदर 'हसीना' भड़की! मैंने पैग बना दिए थे, सिगरेट ली और धुआं छोड़ने लगा! सिगरेट भी नमी का शिकार होने लगी थी, उसकी जवानी की कड़कता को, म...
