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"मैंने इच्छा प्रकट की!" बोला वो,"कैसी इच्छा?" पूछा मैंने,"उन्हें स्वास्थ्य-लाभ होता, मैं कर सकता था, चाहता तो क्या नहीं कर सकता था उनके लिए! मेरी क़ैद ...
सामने ही वो अस्तबल था, नांद तो अभी भी बनी हुई थी, साफ साफ़ दीखता था कि बड़े पैमाने पर यहां नील की खेती से प्राप्त कच्चे माल को साफ़ किया जाता था, पकाया ज...
"नहीं! तुम अकेले नहीं हो! नहीं हो अकेले! अकेले तो हम जैसे मनुष्य होते हैं! तुम नहीं हो! मेरे पास इस संसार में, तुम्हारे लिए कोई शब्द नहीं, जिसका उदगार...
समय तो बहुत बढ़िया हुआ था उस समय! खिलता सूर्य और मदमस्त सी बहती हवा! एक अजब सा नशा चश्म में जैसे बानूर हो चुका था! कदमों में एक अजब सो खुमारी जैसे दरपे...
"बताओ?" बोला मैं,"तुम सब जानते हो!" बोला वो,"नहीं, जान रहा हूँ!" कहा मैंने,"सब जानते हो!" बोला वो,"तुम मुक्त हो गए थे?" पूछा मैंने,"हाँ! मुक्त हो गया ...
रघबीरो? ये तो कोई देहाती महिला का सा नाम लगता था, हाँ, था तो देहात ही वो सब क्षेत्र, रघबीरो जो नाम लिया गया था, अवश्य ही किसी से वाबस्ता तो रहा ही होग...
नहीं पता! नहीं! ये उत्तर तो था ही नहीं! ये तो वो बोल ही नहीं सकता था कि उसे पता नहीं! उसे सब पता था, सब! क्या आरम्भ था और क्या अंत! सब पता था उसे! नही...
एक तीव्र सी गंध फिर से उभरी! जैसे आसपास केवड़े के फूल ही फूल घिरे हों! हो न हो, बाबा मेघसाल अवश्य ही जुड़े थे इस पिशाच से! इनका आपसी कोई न कोई संबंध तो ...
"लो लाला जी, बुला लीजिए केशू को, चलें हम फिर!" कहा मैंने,"हाँ, अभी" बोले वो,दी आवाज़ उसे, कुल्ला करके, देखा केशू ने हमें, सर हिलाया और पानी फेंका बाहर,...
"सत्य कह रहा हूँ!" कहा मैंने,"जानता हूँ!" बोला वो,"हाँ, इसीलिए बोला!" कहा मैंने,"मैं पहला भी नहीं, अंतिम भी नहीं!" बोला वो,"हाँ, सच कहा!" कहा मैंने,"प...
"जान लूंगा!" कहा मैंने,"जान लो!" बोला वो,"तुम कब से हो यहां पर?" पूछा मैंने,'"मैं?" बोला वो,"हाँ, तुम?" कहा मैंने,"नहीं जानता!" बोला वो,"नहीं बताना चा...
वो आवाज़, पल भर को ही हुई थी वैसे, लेकिन मेरे तो अंदर तक, सबकुछ हिल गया था! बड़ी ही घनघोर सी आवाज़ थी वो! और जब मेरे नेत्र खुले तो मैंने ठीक सामने एक महा...
''हाँ, ताक़त तो रखता ही है, तभी तो भन्जन किये जा रहा है!" कहा उन्होंने,"एक बात नहीं समझ आती?" कहा मैंने,"वो क्या?" पूछा उन्होंने,"ये सामने क्यों नहीं आ...
सामर्थ्य तो वो मुझे दिखा ही चुका था और दिखा भी रहा था! मेरे शक्ति-संधान उसने काट डाले थे, कोई वार नहीं किया था, इसका मतलब वो मेरा अहित नहीं चाहता था, ...
और हम दोनों चल पड़े आगे के लिए! मैंने टोर्च उन्हें पकड़ा दी थी, वे ही चल रहे थे साथ मेरे, अचानक ही वे चौंक पड़े! रुक गए! मैंने पीछे देखा एकदम से!"क्या हु...
