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किसी के साथ, धोखा करना आसान है, आँखों में धूल झोंकना आसान है, किसी को बरगलाना, शब्दजाल में फंसाना, आसान है, परन्तु ऐसी असहाय, अडिग, सरल और वृद्ध अम्मा...
"तो तुम रघबीरो को छोड़ कर, वापिस लौट आओगी?" पूछा मैंने,"दसहरा बाद" बोली वो,"अच्छा!" कहा मैंने,"अम्मा?" बोले शर्मा जी,"हाँ भैय्या?'' बोलीं अम्मा,"कब है ...
गुजर गया था, उसका लड़का गुजर गया था, इसीलिए, ये शब्द सुनकर, मेरे मुंह में मेरे ही शब्द, अटक कर रह गए थे! ये कैसा खेल है तेरा ओ मेरे ईश्वर! कहीं तू अम्ब...
अम्मा कुछ भी न बोली! बस चुप! चुप ही रही! रतियारी वाली आँखों में, सुबह का इंतज़ार लिए! या फिर, अपने गंतव्य का ही! लेकिन, फिलहाल में तो उसको, अपनी उस धेव...
"बात सहने की नहीं" बोले वो,"तो फिर, क्या?'' पूछा मैंने,"इस अभागन की सिसकियाँ सुन कर जी खराब सा होता है!" बोले वो,"किसी का भी होगा!" कहा मैंने,"अरी, रघ...
वो सिसकियाँ ही थी, अब सिसकियाँ तो थीं, लेकिन कहाँ से आ रही थीं, किसकी थीं, ये बताना ज़रा मुश्किल ही था! अंदाजा नहीं लग पा रहा था, एक तो बीहड़, और फिर अँ...
सामने एक रौशनी थी, जैसे कोई मद्धम सी लालटेन लिए खड़ा हो! जैसे दीया अपने चौथेपन में बस लोप होने को ही हो, लेकिन रौशनी टिमटिमा नहीं रही थी! और ऐसी किसी भ...
"गौर से सुनो?" बोले वो,मैंने गौर से ही सुना, लेकिन कोई हो तो न? कोई भी तो नहीं था, मुझे तो सच में, कुछ नहीं सुनाई दे रहा था, उन्हें ही सुनाई दिया था, ...
"हाँ, बिल हैं ये भी, लेकिन इतने छोटे?" बोला मैं,"चूहे?" बोले वो,"नहीं!" कहा मैंने,"फिर?" बोले वो,"ये शायद दीमक के हैं!" कहा मैंने,"भागो फिर तो!" बोले ...
तो बतियाते बतियाते हम उस बीहड़ में जा पहुंचे! अब बीहड़ में भी एक अलग ही माहौल रहा करता है! पसरा हुआ सन्नाटा, दूर दूर तक बीयाबान! कोई आवाजाही नहीं! जैसे ...
तो इस तरह हमने, भोजन आदि ले लिया था, कुछ थोड़ा बहुत ज़रूरी सामान भी, जिसकी ज़रूरत पड़ सकती थी, अक्सर पड़ ही जाया करती है, औ शाम के इस तरह से बज गए सात, मैं...
"जग्गू को कैसे तंग कर दिया?" पूछा मैंने लाला जी से,"तंग ना!" बोलै जग्गू,"फिर?" पूछा मैंने,"सोचा आपके साथ हो जाए?" बोले वो,"किसलिए भला?" पूछा मैंने,"ऐस...
"आइये शर्मा जी, लाला जी!" कहा मैंने,"वापिस?" बोले शर्मा जी,"हाँ!" कहा मैंने,"हो गया काम?" पूछा उन्होंने,"हाँ, लगभग आधा!" कहा मैंने,"हमें भी समझाओ?" बो...
"कैसी पिंडी?' पूछा मैंने,"बंजारों की" बोले वो,"बंजारे?'' मैंने चौंक कर पूछा,"हाँ, आते जाते थे यहां वो!" बोले वो,"माँ चामड़ के लिए?" पूछा मैंने,"हो सकता...
"आपने कहा नदी सी?" कहा मैंने,"हाँ, अब नद्दी सी" बोले वो,"ये ऐसी ही नहीं थी इसका मतलब?" कहा मैंने,"नहीं जी" बोले वो,"अच्छा!" कहा मैंने,"हाँ, ये ऐसी नही...
