Last seen: May 11, 2026
हड़बड़ा कर, उठते हुए, सामने देखा रमेली ने! अब जितना देख सकती थी, उसके कोटरों में धँसी आँखें, जितना दिखा सकती थीं, देखा उसने! सामने से, एक बाबा चले आ रहे...
बेचारी रमेली! चल पड़ी उस लड़की के साथ! चली नहीं, चल पड़ी, या यूँ कहें कि चलना पड़ा! जब चोर पकड़ा जाता है और कुछ रास्ता नहीं दीखता निकलने लक, तो सारा तिकड़म ...
"अम्मा! चल, अब वक़्त हुआ!" कहा मैंने,अब अम्मा संयत सी हो चली थी! बेचारी, करती भी क्या! कुछ भी नहीं! बस, उसी पल को, आखिरी बार जी रही थी वो! सच्चाई का सु...
जिन मित्रों का सम्बन्ध गाँव से रहा होगा, वो शायद जानते ही होंगे, कि कैसे गाँव में कोई आया करता था, साइकिल पर एक लकड़ी की पेटी बांधे हुए, पेटी भी साइकिल...
"बेटी?" आयी आवाज़ बुधिया की!"रुक जा रमेली?" बोली माँ,रुक गयी वो! जी पर चाकी चली थी, भले ही रुक गए थे चाक, लेकिन विवशता का अन्न, चाकों के बीच से जा रिसा...
अम्मा चुप! शायद, आज पहली बार उसको, कुछ पता चला था, ऐसा नहीं कि उसने रास्ते की मालूमात नहीं की थी, की थी, कुछ लोगों को वो मिली भी थी, लेकिन उस जगह से व...
"अरी! अरी ये बातें मत न सोच, दूर से आया हूँ, तेरे लिए ही तो! बेटी, आ समझा दूँ तुझे कि कैसे प्रयोग करनी है! ठीक है?" बोला बैदू!बाबा बैदू से बातें करते ...
हाँ! ज़रूरी है इनका मान-सम्मान! कहने को जिव्हा तो दो हैं, पर बोल नहीं सकते! हाँ, देखते सब हैं! हम से तो बेहद समझदार हैं! तभी तो देवत्व प्राप्त किया है ...
"हाँ अम्मा? अम्मा?" पूछा मैंने,अम्मा, अब ज़ोर ज़ोर, सांस ले! जैसे, सांस, अटके जा रही हों! जैसे, बड़ी ही मुश्किल से, मुंह से बाहर आ रही हों!"क्या हुआ अम्म...
कुछ सोचा? कुछ सोचा हमारी इस रमेली ने? नहीं! सरल-हृदय रमेली क्या सोचती! सांप तो आते ही थे! चला आया होगा कहीं से! और फिर, नाग, देवता भी तो हैं! आ रहे हो...
"अम्मा, चल!" कहा मैंने,"चल?" बोली अम्मा,"हाँ अम्मा! चल!" कहा मैंने,"कित?" पूछा अम्मा ने,"अब इंतज़ार खत्म अम्मा!" कहा मैंने,"आ ली छोरी?" बोली अम्मा,खड़े ...
माँ ने कुछ बोलना चाहा, लेकिन वो तो अपने गीत में लगी हुई, टांकण कर रही थी फूलों का! अपने आप में ये दृश्य आप चित्रित कीजिये! हृदय ही फट जाएगा इस दृश्य क...
कुछ न बोल सकी, बोलती भी क्या भला! था ही क्या उसके पास! माँ-बाप और बहन का साथ न होता तो ये जीवन उसका कैसे कटता ये भी जानती थी वो! कभी कभी लगता है कि भग...
मै एकटक उस अम्मा को बैठे हुए देख रहा था! कभी हँसता, मुस्कुराता और कभी ग़मगीन हो उठता! हँसता, मुस्कुराता कि अब, लाखी का इंतज़ार खत्म होने को है, और ग़मगीन...
