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"जोगन?" बोला वो,"महाराज?" बोली वो,"ज़रा मेरी पुतली निकाल?" बोला वो,"अभी" बोली वो,उस जोगन ने, सामान लिया उस सहायक से, झोले में खटर-पटर की, और एक थैली सी...
आ गए वे दोनों साधू के पास, साधू ने, उस रमेली को ऐसे देखा जैसे कि वो कोई शिकार हो! रमेली, बेचारी, अनजान सी, वहीँ खड़ी रही!"जा लक्खी?" बोला वो,"जी?" बोले...
"मैं डर गयी थी!" बोली रमेली,"रमेली, मेरे होते हुए कभी नहीं डरना!" बोली वो,मुस्कुरा पड़ी रमेली!"फूल चाहिए न?" बोली मृदा,"हाँ, आज हमारे यहां एक भी फूल नह...
अब लड़की गयी जी बाहर की तरफ, अब तो मोल ही खरीदने पड़ते, फूल नहीं मिल पाते तो समस्या ही हो जाती, रंगशाला का सारा काम और साज-सज्जा फूलों से ही होता था! पि...
उधर, रमेली, अपने कमरे में बैठी थी, न जाने उसकी पीठ पीछे क्या क्या हो रहा था! कौन नाग और क्या झाला! उसे तो कुछ नहीं हुआ था? कुछ हुआ था क्या? क्यों वो स...
"समझा नहीं आता जोगन?" बोला वो,"क्या महाराज?" बोली वो,"नाग यहां क्यों आएगा?" बोला वो,"पता लगाओ महाराज?" बोली वो,"क्या सिद्ध किया है?" बोला वो,"किसने मह...
वाह रे बाबा! जब रमेली दुखी थी, तब कोई नहीं आया! जब उसकी देह उसे, खुद ही खा रही थी, तब कोई साधू, महाराज नहीं आया! तब किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया! तब ...
"हूँ, अच्छा कैसा था वो सांप?" पूछा उसने,"छोटा था" बोला वो,"कितना?" पूछा उसने,"जी, इतना" बोला हाथ से बताते हुए,"बच्चा होगा?" बोला वो,"हाँ जी" बोला वो,"...
"हो?" बोली उचक कर वो!"जा, झारी ले आ तो?" बोला वो,"हो!" बोली वो,और चल पड़ी, साधू बाबा के सामान की तरफ! एक झोले में से से कुछ सामान निकाला, सामान में से ...
लक्खी की पकड़ से हट गया साधू! उसकी नज़रों ने कुछ पकड़ लिया था! इसी की जांच करने लगा था वो! छीन-झपट बहुत होती है इस क्षेत्र में! इसीलिए, कोई भी चीज़ अगर बि...
उस रात! रात? हाँ, हम आँखों वालों के लिए तो रात ही होगी वो! अब जिसकी आँखें रमेली जैसी हों तो क्या रात और क्या दिन! तो जी, रात ही कहूंगा मैं! रात को, भो...
कोई, सफेद सी पोशाक में, चला आ रहा था उधर के लिए! क़दम बड़े सधे से थे उसके! जब नज़रों में आया कोई, तो ये दो थे, दोनों ही पुरुष! लेकिन? ये क्या? बुधिया बाब...
तो, दूध पिला दिया उसे! और वो भी, जैसे प्रसन्न हो, बहुत ही, उसके हाथ से, सर रगड़ता रहा अपना! मानो तो पत्थर मीत, न मानो तो सूरज भी सीत! यही हुआ था! वो सर...
"रमेली?" बोली माँ इस बार गुस्से से!कशमकश ज़ारी ही रही हाथों की दोनों की! कभी ऐसी ज़िद नहीं करती थी रमेली! आज तो जी को कुछ ज़्यादा ही चोट पहुंची थी उसके! ...
डलिया छोड़ी वहीँ पर! फूल गिरें तो गिरें! कुचलें तो कुचलें! वो भागी! भागी बेचारी! उस कुब्ब को ढो भागी बेचारी! उसी दिशा में, जहां वे दोनों भाग लिए थे! "र...
