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"सौगन्ध चंडी की, अब नहीं छोडूंगा! बहुत देख लिया इन्हें! ढाढर नाम है मेरा! कोई नहीं बचा सकता! कोई भी नहीं! चाहे कैलास आये, या फिर, जगभाल!" बोला मुट्ठी ...
साधू के तो जैसे पाँव ही कटे! जैसे जान ही निकल गयी हो! बाबा ढाढर का ये कहना? समझ नहीं आया साधू को! अब जब मौत सामने हो, तो कैसे कैसे ख़याल आते हैं मन में...
वहाँ अब सन्नाटा सा छा गया था, बाबा, कान खोल सभी आवाज़ें सुने जा रहा था! कोई झींगुर बोलता तो भी मुस्तैद, कोई पत्ता हिले तो भी मुस्तैद! उसके संगी साथी, ज...
वक़्त बीता! और बजे आठ! साधू महाराज ने, उधर , चार अलाव जलवा लिए थे पहले ही, उनका ही प्रकाश था वहां, दो लालटेन भी थीं, ईंधन-पानी सब तैयार रखा था! भूमि का...
"बीनू?" बोला वो साधू."हो?" कहा उसने,"जा, लक्खी को बुला?" बोला वो,"हो!" बोला और चला गया, साधू वहीँ उस कट्ठे के पेड़ के नीचे, जा खड़ा हुआ, कुछ ही देर बाद,...
मित्रगण! इतनी ये घटना सुन कर, हम सोने चले गए थे, मेरे साथ कर्ण साहब थे, वे एक मध्यम दर्ज़े के व्यवसायी हैं, जितना मिले उसी में सन्तोष! और ऐसा होना भी च...
जोगन चली, बीनू के पास, और साधू ने, अपना सामान रखा निकाल कर, इसमें कुछ जंगली औषधियां, बनफूल आदि थे, शायद सर्प को पकड़ने में काम आते! साधू जैसे आज ठान क...
उधर, वो साधू पहुंचा बाबा ढाढर के पास! बाबा ढाढर के पास, कुछ शक्तियां थीं, उसे ज्ञान था इस विषय में! उसने जब इस विषय में सुना, तो प्रसन्नता के मारे, वो...
अब खींची उस जोगन ने, तो पता चला कि ये तो सर्प-केंचुल है! बाहर निकाली तो ढेर सा इकठ्ठा हो गया!"जोगन?" बोला वो,"हो?" बोली जोगन,"ये तो केंचुल है, है न?" ...
"कौन?" पूछा साधू ने,"जैसे किसी और ने पकड़ा हो, महाराज?" बोली वो,"हम्म" बोला वो,कुछ देर, आसपास तांक-झाँक की उसने, कुछ सामान उठा कर, इधर उधर रखा, फिर खड़ा...
नाग! दरअसल, नाग कहते किसे हैं? क्या कोबरा को? या फिर, किसी फन वाले सर्प को? या ये कुछ और ही है? नाग का अर्थ है, विशेष-सर्प, ऐसा सर्प, पौराणिक मान्यता ...
कुछ भी छूटे नहीं! वाह री जोगन! नाच न जाने, आंगन टेढ़ा! कुछ भी छूटे नहीं! अब इसे मूर्खता न कही जाए तो भला क्या कहा जाए! जीवनदान मिला! अभयदान ही कहिये! ल...
साधू के होश गुम! उसके साथ आये जोगन और वो सहायक, इस से पहले कि कुछ समझते, साधू की निकली चीख ने अंदर तक कंपा कर रख दिया उन्हें! वे दोनों, पागलों की तरह ...
रुके गए थे वे सभी! जो कुछ भी था, उस दंड लिए साधू को दीख रहा था! साधू सिद्धहस्त था इस विद्या में! पहचान ही गया था वो!"सामने आ?" बोला वो,कोई नहीं आया,"न...
"बीनू?" बोला वो,"हो?" कहा उसने,"तैयार रह!" बोला वो,"हो!" बोला वो,अब खड़ा हुआ साधू, और लिया उसने वो दंड हाथ में, छल्लों को फटकारा उसने और पढ़ एक मन्त्र!"...
