श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

सब उलझा हुआ था यहां! शुरुआत से लेकर, इस कक्ष तक! बारिश अपना रूप दिखाए जा रही थी, छत के एक कोने से, पानी की कुछ लकीरें भी अंदर घुस आयी थीं! इस से तो पत...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

"हाँ? क्या पूछा?" बोले बड़े बाबा,"यही कि बाबा अम्भ के पिता श्री कौन थे?" पूछा मैंने,"बाबा अम्भ के पिता श्री!" बोले वो,"हाँ!" कहा मैंने,"बाबा मेघ!" बोले...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

"तो कहने का अर्थ ये हुआ, और समझने का भी कि इस भाद्रपद द्वादशी को मन्दालवेणि, उस स्थान पर पुनः अवतरित होगी?" पूछा मैंने,"हाँ, होगी!" बोले वो,"अब बाबा क...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

"इसका मतलब, वो सौर-कुंड कहीं नहीं?" पूछा मैंने,"होगा तो अवश्य ही!" बोले वो,"कुछ जानकारी?" पूछा मैंने,"जानकारी!" बोले वो,"हाँ बाबा!" कहा मैंने,"सुना है...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

सवाल पूछता ही, कि तिरपाल पर बारिश की तेज बूंदों ने हमला किया! घनघोर सा शोर हो उठा! और इसी बीच, बिजली कड़की! बिजली जैसे, किसी पहाड़ को चीरते हुए चली गयी ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

घड़ा अंदर रख दिया उसने, कुछ पानी छलक गया था उसकी आस्तीन पर, तो झाड़कर, साफ़ किया उसने, और बाजू मोड़ लिए कमीज़ के, बीड़ी अभी भी मुंह में ही थी, पहलवान छाप बी...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

"हाँ, वे सभी बैठे थे! एक साथ!" बोले वो,"हाँ, बर्फ में तो बिन आग तो जान ही जाए!" कहा मैंने,"हां, दो आग लगी थीं!" बोले वो,"दो?" पूछा मैंने,"हाँ, दो!" बो...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

"कैसी विपत्ति बाबा?" पूछा मैंने,"उस यक्ष लम्भाष की उपस्थिति!" बोले वो,"तो उस से क्या हुआ?" पूछा मैंने,"हुआ!" बोले वो,"कैसे?" पूछा मैंने,"सोचो?" बोले व...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

"प्रसाद?" आयी बाहर से एक आवाज़!ये आवाज़ किसी महिला की थी! प्रसाद बाबा को, प्रसाद नाम से बुलाने वाली महिला, कौन हो सकती है? आवाज़ तो समायु की नहीं लगती थी...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

पन्नी निकाली, पीले रंग की पन्नी थी, उसे ही ले आया वो, और बैठ गया! अब, पन्नी में हाथ डाल, निकाल ली एक बोतल! कौन कहता है कि सिर्फ, सोना ही सम्भाल कर रखा...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

मैंने कह तो दिया था कि समझ सकता हूँ मैं, परन्तु स्वयं को समझना बेहद ही मुश्किल हुआ करता है! ये लोग, जिन योनियों के विषय में बातें कर रहे थे, वे योनिया...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

तो बाबा, भोथरे तीरों के संग लौट ही आये थे या फिर कोई और जुगत भिड़ाई थी? इतनी सरलता से तो हथियार नहीं डाल सकते थे वो! जीवट वाले बाबा रहे हैं और अक्सर, क...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

उन्होंने कुल्हड़ नीचे रखा और एक बढ़िया सी हिचकी ली! कर दी थी मटियामेट मदिरा नीचे उतारते ही! "हाँ बाबा?" कहा मैंने,कुछ कहने से पहले, एक बार डकार ली, मुर्...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

सर्प-मणि की तो बात, कम से कम आती है समझ, कि सम्भवतः ऐसा ही हुआ हो! परन्तु बाबा के अनुसार, वो सर्प-मणि भी नहीं है! यदि वो सर्प-मणि नहीं है, तब क्या हो ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, मन्दालवेणि! प्रतीक्षा? प्रेम?

"बादल बने हुए हैं घनघोर! बारिश पड़ेगी सुबह तक तो!" कहा मैंने,"अब पड़ती है तो पड़ने दो!" बोले शहरयार जी!"हाँ, बाबा, तो खबर आपको दी इस नरसिंह ने?" पूछा मैं...

2 years ago
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