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"ये स्थान जितना दुर्गम है उतना ही रहस्य भी छिपाये है! यहां आज भी, ऐसे ऐसे तपस्वी, तपस्विनी हैं, जिन्होंने, काल पर ही विजय प्राप्त कर ली है!" बोले वो,"...
उस दोपहर मुझे नींद आ गयी थी! लेकिन इस बार ये मेरा सपना कहो या फिर मैं स्वयं ही उधर था, पता नहीं! मैं उस क्षण को नहीं भूल सका हूं! वो, लगता था कि जैसे ...
उस दिन हमने आसपास घूम कर अपना वक्त बिताया, हमें जहाँ जाना था, वो यहां से साठ किलोमीटर दूर था! यहां शहरी आबादी अवश्य ही थी, परन्तु लोग सीधे और मेहनतकश ...
ये वाइन की बोतल थी, बड़ी ही शानदार सी! उस पर डौरा लिखा था पुर्तगाली में! ये अपर-मेनलैंड की थी! मैंने अपने अभी तक के इस जीवन में आज तक इसका नाम भी न सुन...
"पता है, मैं जानता हूँ!" चुस्की भरते हुए बोले वो!"यहां बहुत ही गूढ़ रहस्य है!" कहा मैंने,"ये तो लग ही रहा है!" बोले वो,उसके बाद हम इसी विषय पर बातें कर...
उस कक्ष में, अचानक से ही शान्ति पसर गयी थी! कहाँ से बात निकल कर, कहाँ तक आन पहुंची थी! कितने सारे चरित्र अपना अपना परिचय करवा चुके थे, कितनों से हम भी...
मैं नहीं समझा था कि कैसा मुक्त-व्यापार और क्या वो जॉइंट-वेंचर! मैं कभी भी, इस विषय का छात्र नहीं रहा था और और ये अर्थशास्त्र? मेरे लिए तो काला अक्षर भ...
मुझे इस भाद्रपद द्वादशी का अर्थ, पहले कुछ और ही समझ आया था, और अब, इसका दूसरी बार अलग ही समझना था! वहां लम्भाष से तय हुआ था मिला, बाबा समिध का, उस भाद...
"क्या याद पड़ता है?" पूछा उसने,"कुछ, देखा सा, कुछ लोग फिलिपा!" बताया मैंने,"वो क्या इस तरह के लोग हैं?'' पूछा उसने,"नहीं, वे अलग हैं!" कहा मैंने,"किस त...
"बाबा मेघ ने प्रयास किया या नहीं?" पूछा मैंने,"क्या लगता है, किया होगा? अथवा नहीं?" मुझ से ही पूछ लिया उन्होंने,"हाँ, किया ही होगा अवश्य ही!" कहा मैंन...
"बाबा?" पूछा मैंने,"हाँ?" बोले वो,"क्या ये खेतक ही था?" पूछा मैंने,"नहीं!" कहा उन्होंने,"तो?" बोला मैं,"हठ!" बोले वो,"किसलिए?" पूछा मैंने,"त्रिनेत्री ...
मैं चल पड़ा था उसके साथ! ये रात से पहले का और शाम के बाद का वक़्त था! मुझे तन्दूर में भुनते हुए मांस का ज़ायक़ा महसूस हो रहा था! हर तरफ जैसे जश्न का माहौल...
"क्या? क्या जान गए हैं आप?" हैरत में पड़ते हुए, बाबा प्रसाद ने पूछा!उन्होंने उस समय आर्यसमाजी जैसी पगड़ी ही बाँधी थी, उसके फाल से मुंह पोंछा था! मैं तो ...
तभी मेरी नींद खुल गयी अचानक, वो सुगन्ध मेरे नथुनों में ही बनी रही! मैं काफी देर तक यही सोचता रहा कि ये कैसे अजीब से ख़्वाब हैं? मैं इन पुर्तगालियों के ...
मैं रुका रह गया था वहां, समुद्री हवाओं में मेरे बाल, तितर-बितर हुआ जा रहे थे, बाल, कुछ लम्बे थे मेरे, तो मैं वहीँ, ठगा सा, रुका रह गया था! असमंजस में ...
