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नोट नम्बर नौ..और दस का आधा.................................................इनमें कुछ ख़ास नहीं, कुछ पारिवारिक बातें और उन सभी का उस से मिलने का ज़िक़्र ह...
"देवपुत्र?" बोली इस बार तनिक क्रोधी सी होकर! समझ आता है उसका क्रोध भी! वो उस कुंड की स्वामिनि, स्वर्ण जिसको छू लेने को आतुर हो! स्वयं पवन-गण जिसको मात...
''माफ़ी चाहूंगा, क्या आप मुझे बताएंगे आप किस देश से हैं?" बोला वो डॉक्टर,(यहां एक बात सभी से अलग है, आप देखिये, वो अर्णव, अभी उस समय, हरबेर्टो बन कर बा...
"दम्भी प्रतीत होते हो!" बोली वो,"ये दम्भ है? यदि कर्तव्य-निबाह दम्भ है, तो सही सोचा आपने!" बोले बाबा अम्भ!"गंतव्य दूर है!" बोली वो,"दूर ही तो, अगम्य त...
मैं वो चिलगोज़े छील कर खाने लगा था, बड़े ही मीठे से थे ज़ायके में! यूरोप में इनकी बहुत मांग रहा करती है! और जो मिलता है सामान, वो इतना ताज़ा और शुद्ध नहीं...
और फिर करीब दस मिनट बाद वो वापिस आया, साथ उसके दो और आदमी थे, कुछ सामान पकड़े हुए, और कुछ लोग और भी चले आये थे, कुछ औरतें भी और कुछ लड़कियां भी! मुझे कु...
"अश्व से उतरे तो हर तरफ देखा, मुंह पर, किसी गरम कपड़े के, जो किसी पशु-चर्म से बना था, लपेट रखा था! उनके चारों साथियों ने भी ऐसे ही वस्त्र धारण किये हु...
हम चल पड़े थे जानेर के घर के लिए! रास्ते में तालाब पड़ा, तालाब किनारे कुछ मन्दिर भी पड़े! कुछ लोग भी, फूलों से लदे हुए पौधे भी, पेड़ भी! पीले रंग की तो बह...
बाबा ने कह तो दी थी कि आराम करना हो, तो सो जाओ! पर आज रात नींद किसे आनी थी! आज तो नेत्रों में हमारी नींद के जुगनू जल-बुझ रहे थे! टिमटिमा रहे थे, उस दृ...
तो उसने आगे बढ़कर, दरवाज़ा खोला उस बग्घी का, बग्घी की छत भी थी, ये विक्टोरिया कही जा सकती है! उसके घोड़े मज़बूत, दु-रंगे, लाल और सफेद रंग के, चौड़े नथुनों ...
हम नीचे उतरने लगे, जैसे जैसे नीचे उतरे, नमी की अधिकता बढ़ने लगी, दरअसल आसपास वनस्पतियां बहुत थीं, इसी कारण से, नमी बनी हुई थी! कुछ पत्थर भी थे वहां बड़े...
"बताया नहीं, बाबा घाघ हैं बहुत! वो भी टेढ़े! काम की बात ही करते हैं, मात्र विषय से सम्बन्धित ही!" कहा मैंने,"हाँ, ये बात तो देखी है मैंने!" बोले वो,"वो...
मैं उसी कमरे में आ गया था, जानेर मेरे दिल में यादों के तारों को झनझना गया था! के पल को मुझे लगा कि अभी रॉयल-डच-फ्लीट पकडूं और चला जाऊं, मिल आऊं उनसे! ...
मित्रगण! क्या कहीं से ऐसा लगता है? या महसूस होता है कि कुछ भी बे-तरतीब हो उसके लिखे नोट्स में? या वो खुद ही, अपने होश-ओ-हवास में न हो? या फिर, किसी अव...
उस रास्ते से चढ़ते हुए, हम आगे की ओर चल पड़े! ये रास्ता चढ़ने में कुछ ऊंचाई सी लिए था! सांस सी चढ़ने लगी थी! एक तो अँधेरा बहुत था, टोर्च न होती तो शायद दि...
