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मुझे याद आया वो स्विमिंग-पूल! वो सारा वाक़या! मैं गम्भीर हो उठा! रुका ही रह गया! दिल, ज़ोरों से धड़क कर रहा गया था मेरा! मेरा वो खांचा? क्या हुआ उसका? "आ...
डैफनी कोई तेईस-चौबीस साल की युवती थी, चेहरे के हाव-भाव इकसार ही थे, इसका मतलब था वो पुरुषों के करीब रहा करती थी और आदी थी, उसे इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़त...
"ठीक है, तुम जाओ, बाकि मैं देख लेता हूं!" कहा मैंने,"जी सर!" उसने कहा और सलूट पेश किया, पलटा और चला गया!ये ट्रेविस कैसे आया यहां? कौन लाया? मैंने पहले...
नोट नम्बर दस........ग्यारह...इस से पहले वो आगे बढ़े, उसने कुछ अलग सी बातें लिखीं, सबसे बड़ी बार, उसे ये याद नहीं था कि कब जिशाली वहां से गयी और कब वो व...
"बोलो बाबा? क्या ये यक्ष और वो गांधर्वी, सब जानते नहीं? क्या वे, ये नहीं मानते कि वे दोनों ही, दो उच्चकोटि के महासिद्धों के बीच मात्र गोटियां ही हैं? ...
"क्या नहीं सम्भलता?" पूछा मैंने,"समय!" बोले वो,"कौन सा समय?" पूछा मैंने,"प्रतीक्षा का!" बोले वो,"किसकी प्रतीक्षा?" पूछा मैंने,बाबा चुप हो गए! इधर-उधर ...
"जिशाली!" कहा मैंने,उसने कुछ ध्यान सा न दिया मेरे पुकारने का,"जिशाली?" कहा मैंने फिर से,"ह्म्म्म? कुछ बोले?" बोली वो,"हां!" कहा मैंने,"बोलो?'' बोली वो...
और तभी! तभी सामने के उस जल में, लाल अभ्रक की सी रौशनी कौंधी! ये ठीक ऐसी ही थी, कि ताँबे के चूरे में, या ताम्र-चूर्ण में यकायक कोई चिंगारी छू गयी वो! प...
और मेरी नज़रों ने उसको अपने ही अक्स में उतार लिया! मैंने सुना था, कि हर किसी के दिल में एक खांचा हुआ करता है! एक अलग ही तरह का सा खांचा! जिसमे सिर्फ एक...
"बाबा?" कहा मैंने,"हाँ?" बोले वो,"ये कैसे प्रतिस्पर्धा?" पूछा मैंने,"कैसे लगती है?" पूछा उन्होंने,"मुझे ऐसा क्यों लगता है 'सबकुछ' बाबा समिध कल्याण हेत...
"बाबा?" कहा मैंने,"कहो?" बोले वो,"ये कैसा प्रेम?" पूछा मैंने,"अद्वितीय!" बोले वो,"कैसे मानूँ?" पूछा मैंने,"यही प्रश्न तो किया था मन्दाल से बाबा अम्भ न...
मेरे घुटनों से, उसका वो लहंगा छूता हुआ चला गया था! मेरे पूरे बदन में गुदगुदी सी उठ गयी थी, जैसे मैंने शराब की महक़ में ही गोता लगा लिया हो! मैं, एक पल ...
"कुछ भी असम्भव तो नहीं?" बोली वो,"आपके लिए! संभवतः!" बोले वो,"आप एक बार कहो तो सही?" बोली वो,"मार्ग छोड़ दो मेरा!" बोले वो,"क्यों?" पूछा उसने,"उत्तर सु...
खाना खा लिया गया था, पेट भर गया था बहुत! उसके बाद आराम किया हमने! मुझे एक आरामह्गाह सी लगने वाली जगह पर ले जाया गया, यहां सारा इंतज़ाम था, मैं लेट गया ...
वो मुस्कुराई बाबा अम्भ का उत्तर सुनकर, एक हल्का सा झटका दिया चेहरे को अपने! ओंस जैसी बूंदें, बदन से जा चिपकीं बाबा अम्भ के! बाबा अम्भ ने कोई प्रतिक्रि...
