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अब रात का वक़्त था! रात, जो अब गहराने को थी, जज़्ब कर लेने को थी! आग़ोश में भर लेने को थी सामिया को! और सामिया, अपने उस बिस्तर पर, सीधी लेटी, छत को घूरे ...
हम दोनों बाहर चले आये, सीधे नीचे उतरे और फिर उस सभ्रांत से कक्ष में और फिर बाहर चले आये, लार्स ने बाहर आने से पहले बिल चुका दिया था! और फिर उसके बाद क...
मित्रगण! मुझे न केवल हैरत ही है अपितु ये मेरे विश्वास से बाहर भी है कि कोई ऐसा व्यक्ति, जो उस स्थान पर, कभी नहीं गया हो, पढ़ा भी न हो, सुना भी न हो और ...
अब रात का वक़्त था! रात, जो अब गहराने को थी, जज़्ब कर लेने को थी! आग़ोश में भर लेने को थी सामिया को! और सामिया, अपने उस बिस्तर पर, सीधी लेटी, छत को घूरे ...
प्रकाश यहां मद्धम था! ये तो साफ़ था, ये अय्याशी के लिए ही जगह बनी थी! समृद्धि से पहले ही अय्याशी अपनी जगह और काम, मुस्तैद कर लिया करती है! वही यहां इस ...
गले में ठंडा पानी उतरा तो कुछ एहसास लौटा! उस सर्द रात का! उस अँधेरे का! उस सन्नाटे का! उस धुंध के पर्दों का! उस ठंडे पानी का! वो सर्द एहसास, सहसा याद ...
और इस तरह वो अफ़सर वहां से चला गया, अब बात क्या थी और किस सिलसिले में मुझे उस से मिलना था, या बाद की बात थी, मेरे पास अभी तक कोई आधिकारिक-जानकारी नहीं ...
वो शाम का वक़्त था, अपने घर की छत पर बने, एक कमरे में, आराम से पाँव पसारे बैठी थी सामिया, कमरे में, एक्वेरियम रखा था, जिसमे, छोटी छोटी रंग बिरंगी मछलिय...
वो आगे बढ़ती रही, मन में, कुछ सवाल लिए! वो जगह, वो माहौल, वो एहसास, वैसी धुंध, वो गुंबद! कभी न देखी थी उसने, कभी नहीं! अपनी ज़िंदगी में तो कभी नहीं! और ...
"गेर्बेन के यहां!" बताया उसने,"तुम वहीँ थीं?" पूछा मैंने,"हां!" बोली वो,एक जगह जाकर, मैं रुक गया और फिर आसपास देखा, और फिर वापिस हुआ, फिलिपा से विदा ल...
मुझे, फौरन ही पकड़ा गया, मैं जानता था ये दो से ज़्यादा ही लोग हैं! तो मैं डच भाषा में चिल्लाया और जाने हुआ क्या, कि मैं फर्श पर आ गिरा! इसके बाद मुझे कु...
"सर, आदेश!" बोला वो,"क्या ले आये हो?" पूछा मैंने,"विस्कोन ने यही दी मुझे सर!" बोला वो,"कोई बात नहीं!" कहा मैंने,मैंने, उन दोनों तश्तरियों का ढक्कन हटा...
कि मुझे नींद ने गहरे आग़ोश में आ जकड़ा! मुझे एक साथ ही जम्हाई सी आयी और मैं टेक लगाए अपने बिस्तर की, लेट गया था, अखबार मैंने मोड़ कर, एक तरफ रख दिया था! ...
मैं हरबेर्टो था उस समय! हां! वो फ़ौज का अफसर हरबेर्टो! मुझे लगता था उस लम्हे कि मैं वहीँ लौट आया हूं! एक पल को मेरे अंदर फिर से वही फौजी रुतबा झलकने लग...
