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सच में जी! ये हौलनाक ही है! सोचिये, किसी ने पता पूछा हो, अच्छा-ख़ासा जवान हो, चला जाए दूसरी तरफ रास्ता पूछा आपसे, और आप आगे जाओ, तो वही आदमी, कटा हुआ म...
मेरे प्रश्न से पूछे जाने से पहले ही जैसे वो मुस्तैद हो गए थे! कभी-कभार ऐसा होता ही है, उनके साथ भी यही हुआ था, जैसे ही वो बोलने को लगे, कि खिड़की एक पर...
"हां मास्टर जी?" कहा मैंने,"बस जी, शाम को ले ली थी!" बोले वो हंसते हुए!"तो और ले लो?" कहा मैंने,"बस जी, आप लो!" बोले वो,तो हमने इस तरह से पहला पैग नीच...
"तो क्यों रोका था?" पूछा मैंने,"बता रहा हूँ" बोले वो, रजाई खींचते हुए, अपने घुटने के नीचे से, फिर घुटने पर ऊपर सरका ली!"बताओ?" कहा मैंने,"उसने रोका कि...
"जी, जिस समय मैं चला यही कोई साढ़े नौ बजे होंगे, त्यौहार आने ही वाला था, जगमग हो रही थी हर जगह! बाज़ारों में रौनक थी और देर तक खुल भी रहे थे! तो मैं चल ...
आ गयी थी वापिस हिंदुस्तान सामिया! और इस तरह, दो महीनों में सबकुछ सामान्य हो गया! लेकिन न भूली वो, तो उस अबज़ैर को! शायद उसके दिल में कहीं तो जगह बना ली...
और उसी लम्हे, आँखें पूरी खुल गयीं सामिया की! वो, मुस्काये जाए! देखे जाए, अपने बाएं खड़े अबज़ैर को! और अबज़ैर, उसके माथे पर हाथ रख, चुप खड़ा हो, लेकिन मुस्...
बहती नदी में ठहराव आ जाए तो नदी की रूह फ़ना होने लगती है, और वो भी जब, जब वो नदी बहती, इठलाती, इतराती आगे बढ़े! उसका ये ठहराव, उसके अँधेरे मुस्तक़बिल की ...
जब इंसानी खूबसूरती, किसी ऐसी ही खूबसूरती से टकराया करती यही, वो अपने आप ही, वो जैसे झुक जाया करती है! इंसान की यही फ़ितरत है! हम इंसानों में होड़ लगती ह...
हाँ! पहली बार बोला झूठ! लेकिन क्यों? शायद दो वजूहात हों इसकी! पहली, कि वो ये बताना नहीं चाहती थी किसी को भी कि दरअसल वो अपने तस्सवुर के जहां और जगहों ...
और वाक़ई, वो सच में बेहद सुंदर लग रही थी! उसका हुस्न जैसे उफ़ान चढ़ा था! उस पानी में अपना अक्स देख वो क्या कोई भी बुत-ए- हुस्न अपने आपको अर्जमन्द(सर्वोच्...
तो एक तरह से, ज़ाहिद का पत्ता तो साफ़ हो गया था, या ऐसा भी कह सकते हैं, कि साफ़ कर दिया गया था! ये तो खैर, शुरू से ही दीगर था कि ज़ाहिद जैसा सामिया के बार...
एक घंटा, लगभग, बीत चुका था, उस फाइल को खंगाल दिया था सामिया ने! फिर वो फाइल रख दी अपनी अलमारी में, और चली माँ के पास, अब खाने का वक़्त था! तो उसने खाना...
इस से पहले कि वो कुछ समझ पाती, कुर्सी की टेक से, सर, एक झटके में लुढ़का उसका, और खुल गयीं आँखें! आँखें खुलते ही हुई खड़ी! गयी भागी हुई रसोई तक! खोला फ्र...
