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वो न थी वहां! कमाल की बात! मैं उस वक़्त चौंक उठा! गिलास को देखा, कोई चींटी नहीं वहां, गिलास उठा कर देखा, कुछ नहीं, बस पानी की दो चार बूंदें बस! गिलास उ...
तो हम लोग अभी चले ऊपर की तरफ, धूप सौंधी सौंधी थी, बढ़िया लग रही थी! खिली धूप सर्दियों में अक्सर ही फायदेमंद रहा करती है!"अच्छी जगह रहते हैं ये लोग!" बो...
वो कुछ न बोली, बाहर ही झांकती रही, मैंने भी बाहर ही देखा, कुछ नहीं था, हाँ, दूर, वो रेलवे लाइन थी, जिसके आसपास कुछ खेत से थे, एक केबिन-रूम सा लगता था ...
तो हम बायीं तरफ देखते हुए आगे चलते रहे! सड़क किनारे पेड़ लगे थे, झाड़ियां आदि, इनके बीज हवा के संग आगे बढ़ते जाते थे, एक बीज से कुनबा बनता और कुनबे से से ...
"तुम भी ज्ञान!" बोली वो,"क्या तुम भी?" पूछा मैंने,"दर्शन-शास्त्र की पढाई कर रहे हो न?" बोली वो,"हाँ, कर रहा हूँ!" बोला मैं,"स्वयं का चित-दर्शन किया है...
"तो जी ये शहीद भरे पड़े होंगे?" बोले पूरन जी,"हाँ जी!" कहा मैंने,"ये तो बड़ी खतरनाक बात है!" बोले वो,"खतरनाक इसलिए बस कि जब वे खप गए तो जुझार रह गए, अब ...
खैर! लगा कि खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान! मिसाल सुनी बहुत थी, देख आज अपने पर ही ली थी! कहाँ मैं सोच रहा था कि न जाने कैसे कोई ठौर-ठिकाना नसीब होगा वहां,...
"सच में?" पूछा उन्होंने,"हाँ, सच में!" बोला मैं,"क्या है ये?" पूछा उन्होंने,"वही!" कहा मैंने,"चोण?'' बोले वो,"हाँ!" कहा मैंने,"क्या हैं ये?" पूछा उन्ह...
वे चले गए थे एक तरफ! वो जगह सच में ही शानदार थी! उस बीहड़ में आसरा देती कुछ बनैले पशुओं को, कुछ परिंदों को, और कुछ पानी के परिंदों को! उनकी तेज तेज आवा...
"सभी हैं!" बोला वो,"फिर भी?" पूछा मैंने,"सबसे पहले राजेश जी, फिर मालकिन सविता, फिर अनीता, उनकी बड़ी लड़की, फिर लड़का है, वो बाहर रहता है, नौकरी इसी साल ल...
तो हम आगे बढ़ चले! दी ही अजीब समस्या थी, किया जाए तो क्या? कोई सूत्र हाथ नहीं! वैसे ही जैसे किसी छलावे को ढूंढने के लिए निकले हों! हम आगे आगे और छलावा ...
वे आगे चले और मैं उनके पीछे, और आ गए एक जगह, ये समतल सी ज़मीन थी, कोई खण्डहर या उसका कोई भाग हैं था यहां, हाँ दो स्तम्भ वहां लगे थे, के नाटे से, गोल और...
इस तरह हम वापिस कमरे में आ गए! आये और बैठ गए! हमें देख, उन्हें भी सुकून हुआ! देखा जाए तो अकेला आदमी तो वहां मारे भय के ही सुबह न देख सके! सुनसान, घुप्...
"आओ, वापिस चलें!" कहा मैंने,"कोई जानवर ही रहा हो?" बोले वो,"हाँ, हो सकता है!" बोला मैं,और हम वापिस हो गए! अंदर वे दोनों सिमट कर बैठे हुए थे, आवाज़, बस ...
