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"नहीं! कुछ पलों के लिए जुड़ा तो रहता होगा?" पूछा मैंने,वो खोदते हुए, रुक गए, मुझे देखा,"क्यों?" पूछा मैंने,"हाँ, जुड़ा रहता होगा?" बोले वो,"तब क्या भावन...
अनीता नहीं रुकी, मेरा कमरा भी पार कर लिया था उसने, और फिर रुक गयी! किताब को, उसी दीवार के पास रखी टेबल पर रख दिया! मैं उसी किताब के पास आ कर रुक गया! ...
तो जी, मना करना था, मना कर दिया, अब चाहे वो वास्ता दें या फिर रास्ता, हमें उनको वहाँ नहीं रखना था, तो नहीं रखना था, मैं तो शहरयार जी को रख कर भी एक बड़...
मैं, बर्फ की तरह से जम कर रह गया था! एक से लेकर हज़ार तक सवाल ही सवाल खड़े हो चुके थे, मेरी अपनी सभी मान्यताएं, हवा की तरह से नदारद हो चुकी थीं! मुझे, म...
चहौंसी तलवार, अष्टमी के चाँद के स्वरुप जैसा आकार वाली तलवार हुआ करती है, चूँकि इसे एक ही हाथ से दाएं और बाएं चलना पड़ता है, चलाते हुए ही आगे बढ़ना होता ...
Dec 17, 2016#593 "हाँ! उन्हें रोकना ही होगा! और रोकने के लिए मसान ही तैनात होगा!" बोले वो,"और मुफ़ीद भी!" कहा मैंने,"तब तो अभी समय है!" बोले वो,...
नवम्बर ०१, इतवार, १९८७........................................आज मेरी छुट्टी थी, सो मैं आज निकल गया था सुबह ही घर से, कल शाम से राजेश बाबू जी की भी तब...
नीचे? मतलब?" मैंने इस बार तो हैरानी से पूछा, मैं तो सच में ही अंदर ही अंदर अपनी इस 'पढ़ी-लिखी' मूर्खता पर हंसे जा रहा था! मोटे मोटे शब्दों में, एक पागल...
"किसी सोये हुए सैनिक या शहीद के बारे में सुना है?" पूछा मैंने,"सैनिक?" बोला वो,"हाँ, सुना है?" पूछा मैंने,"नहीं, अब तो कोई सैनिक नहीं?" बोला वो,"अब नह...
"कुछ मिल जाता है?" पूछा मैंने,"हाँ, कभी कभी!" बोला वो,"कितने सिवाने जाता है?" पूछा मैंने,"यहां के सारे" बोला वो,"पुराना सिवाना कहाँ हैं?" पूछा मैंने,"...
करीब पांच मिनट बीत गए! मुझे लगा कि बहती हवा में कोई नमी सी बहने लगी है! सबकुछ शांत था, पर न जाने क्यों मेरी खाल पर, रोएं से खड़े होने लगे थे! ये मस्तिष...
वहम भी बड़ी अजीब ही चीज़ होती है! बन जाए तो उम्र भर संग लगे, कट जाए तो सिर्फ हंसी ही! लेकिन ये मेरे लिए हंसी न थी! रात के ढाई बजे, इस तरह मैं और अरुमा, ...
"हाँ जी! सभी के साथ ही है ये तो!" बोले कृष्ण जी,"आज हमारे, कल तुम्हारे!" बोले शहरयार जी,"सच कहा आपने!" बोला मैं,"वैसे सामान ये रहा, ये रही फेहरिस्त!" ...
"हाँ!" बोली वो,"कैसी याद, अरुमा?" पूछा मैंने,"चलो, बता दूंगी!" बोली वो,"उम्मीद है!" कहा मैंने,"रखिये!" बोली वो,"जी!" बोला मैं,"वक़्त क्या हुआ?" पूछा उस...
अब कोई रास्ता न बचा था, मात्र यही कि उनको स्वयं ही आमन्त्रित किया जाए! और जब जो हो, सो हो! उनका आमन्त्रित करना ठीक वैसा ही था कि किसी धारदार फरसे के न...
