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वक़्त थम सा गया था, जैसे गुबार के पीछे से सब नज़र आ गया था! मैं सभी को एकटक देखे जा रहा था, उन पर जो बीती थी, वो बेहद ही नृशंस रही होगी, अंदाजा लगाया जा...
उसको पार किया, तो एक कमरा आया, कमरे के बाहर, एक हण्डा जला था, अभी भी, एक गोल से चबूतरे पर, उसकी रौशनी भले ही मद्धम हो चली थी, लेकिन कुछ जान बाकी थी उस...
"नहीं!" कहा मैंने,"बैठ जाओ? हूँ? बैठ जाओ न? मान जाओ?" बोली अब वो,ठीक कतराए हुए से स्वर में! पल में कुछ और पल में कुछ! मैंने, लिया कुछ निर्णय! और बैठ ग...
जी भर के खाया था हमने! भुक्खड़ों की तरह से लीला था सबकुछ! अब भले ही थोड़ा थोड़ा ही खाया हो, लेकिन खाया था ज़रूर ही! हाथ अपने आप ही चला जाता था चीज़ों पर! ख...
कबाब और टिक्के अपने मसाले के साथ खूब ज़ायक़ा बांधे हुए थे! जी नहीं भर रहा था! लेकिन फिर भी, बस कहना पड़ा! हालांकि, हरदेव ने और कहा कि और हो जाएँ, लेकिन अ...
तो अब महफ़िल जवान हो चली थी! बाहर आतिशबाजी भी छिटपुट ही हो रही थी! हाँ, शोर, ढोल-ताशे, नगाड़े अभी तक बज रहे थे! बैठे बैठे वैसे हम भी ठोस अलसा से गए थे! ...
"चलो!" कहा मैंने,"आओ!" बोली वो,मैं चला तब उसके साथ! कोई तालाब ही था वहां, ठंडक सी उठ रही थी वहां से! वो मुझे, मेरा हाथ पकड़ कर, ले चलती जा रही थी! सामन...
राग केदार का जलवा बहाल था! हम सभी उसी राग केदार में चुए(रिसते) जा रहे थे, न अपनी ही सुध थी, खुदी की, न अपनी देह की ही! कब हाथ थिरक जाएँ, पता नहीं, कब ...
"अब उतार दो!" बोली वो,मैं रुक गया, और उतार दिया उसे!"सच में!" बोली वो,"क्या?" कहा मैंने,"मुझे मजा आएगा!" बोली वो,"कैसा मजा, भला?'' पूछा मैंने,"मरने मे...
खसखस, मूल रूप से अफ़ग़ानिस्तान की पैदाइश है! वहां से ये हर जगह फैला है! मैंने बताया था कि मुग़लों को बागों से, पेड़, पौधों से, फूलों से बेहद लगाव था, उनके...
आतिशबाजी की धुआंधाड़ और शोर से, सारा माहौल जैसे भनभनाया हुआ था! रह रह कर धमाकों की आवाज़ें आ रही थीं! पल भर में ही, कमरा जगमगा उठता और फिर से सामान्य हो...
कुछ पल, मैं देखता रहा उसको! और वो, वो मुझे! जैसे, कोई चूहा फंस जाता है, कोई रास्ता नहीं बचता उसके पास, जब वो आभास पाता है, अपने पास ही मौजूद, सांप का,...
अब हम कमरे में तीनों ही थे, मुझे अब कमल जी कुछ कुछ, सम्भले से लगने लगे थे, कर्णव-मंत्र एक शाबर मंत्र होता है, ये असरात को बंद कर देता है, जब तक कि व्य...
"सुनो?'' कहा मैंने,"हाँ?" बोली वो, अपने कपड़े ठीक करते हुए!"तुम मुझे जानती हो न?" पूछा मैंने,"हाँ!" बोली वो,"जानता हूँ!" कहा मैंने,"कहाँ ले जा रही हो?"...
अब बारात आ पहुंची थी, बग्घियां अब आगे बढ़ने लगी थी! हमारी बग्घी अभी वहीँ खड़ी थी, हमें इंतज़ार था हरदेव का! वो आता तो पता चलता कि जाना कहाँ है हमें! बग्घ...
