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"क्या वो कुँए पर ही रहता था?" पूछा मैंने,"हाँ, वहीँ" बोली वो,"अकेला?" पूछा मैंने,"नहीं" कहा उसने,"फिर?'' पूछा मैंने,''साधना समय" बोली वो,"अच्छा!" कहा ...
लिलहान! ये एक पाताल-वासिनी शक्ति है! अलग अलग नाम से जाना जाता है इसको! कहते हैं, पाताल का द्वारपाल है ये! इसका सामर्थ्य अपार है! परन्तु साधना महा-क्लि...
भोर ने छू लिया था ज़मीन का आँचल! धूप खिलने लगी थी! सुबह के परिंदे, भोर के स्वागत में जुट गए थे! पर मेरे मन में, मेरे विकारों के परिंदे, जस के तस बैठे थ...
"ओह! ओह!" बोली वो, चिपके ही!"क्या हुआ कंचन?" पूछा मैंने,"नहीं मरने दोगे न?" बोली वो,"हाँ, नहीं मरने दूंगा!" बोला मैं,"काट लूँ?" बोली वो,"काट लूँ?'' पू...
मैंने कंधे से पकड़ा उसको! जैसे ही पकड़ा, मुझे जैसे, अपने अंदर ही, एक झटका सा लगा! उसका बदन, जैसे ज्वर-ग्रसित था, गरम, जैसे, तेज बुखार हो उसे! मैंने झटके...
"कंचन?" बोला मैं,"हूँ?" दिया जवाब उसने,"ये सब, है क्या?'' पूछा मैंने,"जान जाओगे!" बोली वो,"कब?" पूछा मैंने,"जल्दी ही!" बोली वो,"सच बताना?" कहा मैंने,"...
"समझते तो....अब हो तुम?" बोली वो,"कैसे पता?'' पूछा मैंने,"मना क्यों नहीं करते?'' बोली वो,"अब...ब.....कैसी मना?'' पूछा मैंने,हंसी, हल्की सी, एक षड्यंत्...
"चुप?" बोली वो,"हूँ!" कहा मैंने,"जान कर भी?" पूछा उसने,"हाँ!" कहा मैंने,"चुरा लूँ तो?" पूछा उसने,"अच्छा?" कहा मैंने,"बोलो?'' बोली वो,"देख लो?" कहा मैं...
"है न फ़र्क़?" पूछा उसने,अब मैं, कुछ न बोलूं, क्या बोलूं? नहीं बोलूं, तो चुप कैसे रहू? चुप ही रहूँ, तो भला कैसे? अब पता होना, एक अलग बात, जान कर चुप होन...
"ये तो मुझे भी नहीं पता!" बोली वो,"क्यों?" पूछा मैंने,"आज पहली बार देखा!" बोली वो,"क्या?" पूछा मैंने,"तुम्हें यहां!" बोली वो,"पहली बार?" पूछा मैंने,"ह...
"तो? कौन ले जाएगा मुझे?" पूछा मैंने,"या तो स्वयं या फिर बाबा को ले जाना!" बोली वो,''एक मिनट! क्या बाबा को मालूम है ये सब?" पूछा मैंने,"नहीं!" बोली वो,...
मैंने जैसे ही देखा, पलट कर, बाहर के लिए, कि पता नहीं वो कब उठी, और मुझे मेरे कंधे से पकड़ लिया! बाहर तो कोई नहीं था, स्याह सा अँधेरा और कुछ कीटों के स्...
"आओ!" बोली वो,''चल रहा हूँ!" बोला मैं,कुछ ऐसे ही चले, शांत से हम दोनों! मैं पीछे पीछे चल रहा था उसके, उसके पूर्ण पृष्ठ-भाग को देखते हुए, चाल में एकसार...
"मानना ही होगा!" कहा मैंने,''और जो, न मानूं......तो?" बोली वो,"तो तुम रहो इस बीहड़ में, मैं चला वापिस!" कहा मैंने,"जा सकते हो?" पूछा उसने,"क्यों नहीं?"...
हवा में कांटे भी हुआ करते हैं, ये तो पहली बार जान रहा था मैं! हवा के वो झोंके, चुभ रहे थे, वो हवा किसी हक़ीक़त को अपने आग़ोश में क़ैद किये जैसे मज़बूर किय...
