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"क्या हुआ था शतीला उसके बाद?" पूछा मैंने,वो चौंक पड़ी!"क्या बोला? क्या बोला तू?" बोली तुनक कर,"शतीला!" कहा मैंने,"नहीं! तू मत बोल!" बोली वो,"क्यों?" पू...
मैं हँसता रहा, जी तो चाहा रो ही पडूँ! रो पडूँ! कितना पास होकर, कहाँ रुक गया था मैं! सबकुछ मिलने के बाद भी, रिक्त ही रह गए मेरे पात्र! और........काजल स...
उधर सरपंच, रोज ही मिट्टी फांक रहा था, क्या किया जाए? कैसे किया जाए? सामने जाने की हिम्मत थी नहीं, बात बने तो बने कैसे! कोई पल न जाए जब नयना का रूप उसे...
"लोना!" कहा मैंने,"हूँ?" बोली वो, चिपके हुए ही!"मुझे भी इस अमश्च-ध्वांत से रिक्त कर दो!" कहा मैंने,"मैं अग्रगामिनि हूँ अब!" बोली वो,"मुझे द्यौ से तलोन...
मैंने तभी, गला छोड़ दिया उसका! अब मैं जान रहा था! संशय अब, सच में बदलने लगा था! मैंने, उसको, नहीं रोका अब किसी भी मंसूबे से! देखना चाहता था कि लोना कित...
उधर सरपंच, रोज ही मिट्टी फांक रहा था, क्या किया जाए? कैसे किया जाए? सामने जाने की हिम्मत थी नहीं, बात बने तो बने कैसे! कोई पल न जाए जब नयना का रूप उसे...
"समय नहीं चुकता!" बोली वो,"चुकता ही तो है!" कहा मैंने,"ऐसा मानना ही तो है?" बोली वो,"किसका, लोना?" पूछा मैंने,"आपका तो नहीं कहा मैंने?" बोली वो,कभी आप...
मैं स्कूटी रोकी उधर! शर्मा जी को ताक़ीद किया कि वो यहीं रहें, अँधेरा है काफी, यदि लौटना चाहें या घाट पर जाना चाहें, तो जा सकते हैं! वो वहीँ रुकेंगे, ऐस...
"वर्तमान!" बोली वो,"हाँ!" कहा मैंने,"हाँ!" सर हिलाया उसने, उसकी चिबुक से टपकता जल, मेरे वक्ष-स्थल पर गिरता तो मैं, जैसे ईंधन की एक बून्द की तरह से, भक...
मैं किस को देख रहा था?कोई देवी?या कोई यक्ष-कन्या?ऐसा रूप? मनुष्य में तो हरगिज़ नहीं हो सकता! उज्जवल श्वेत-वस्त्र! उज्जवल-काया, दैदीप्यमान मुख-मंडल!"ए? ...
कैसे कर लिया? ये हैरत की बात थी! कम से कम मेरे लिए! कैसे, मैं अपने आप में नहीं रहा? क्यों? भला क्यों? "आओ?" बोली वो,और मैं, जैसे अब उसके नियंत्रण में ...
उसके नाख़ून से, मेरे कान की झल(कान का निचला भाग), सीधे कान की झल पर, एक छोटी से खरोंच पड़ गयी थी, उसने देखा उसे! उसका खून हटाया! अपने हाथ से साफ़ किया!"ख...
अचानक से, मेरे शरीर पर, जैसे जल के कुछ छींटे से पड़े! ये छींटे ज़्यादा तो नहीं थे, मेरे बंद होंठों के बीच एक बून्द, सीधे नथुने में एक बून्द, आँख की पलक ...
अचानक ही, मुझे लगा कि मेरे पीछे कोई है! मैं देखने के लिए मुड़ा, लेकिन कोई नहीं था, शायद अभी भी मैं वहम में ही फंसा था! क्या वो लोना थी? वही लोना? या को...
उसने पलट के मुझ को देखा, घूरा! संजीदा हो कर! मेरा हाथ पकड़ा, और अपने दोनों हाथों में, भर लिया! मेरे हाथ को देखा, मेरे हाथ में, उलटी तरफ, जो बाल थे, उनक...
