श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०१४, फैज़ाबाद, उ.प्र. की एक घटना!

"क्या हुआ था शतीला उसके बाद?" पूछा मैंने,वो चौंक पड़ी!"क्या बोला? क्या बोला तू?" बोली तुनक कर,"शतीला!" कहा मैंने,"नहीं! तू मत बोल!" बोली वो,"क्यों?" पू...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, शालोम की वो एक अवंग-साधिका!

मैं हँसता रहा, जी तो चाहा रो ही पडूँ! रो पडूँ! कितना पास होकर, कहाँ रुक गया था मैं! सबकुछ मिलने के बाद भी, रिक्त ही रह गए मेरे पात्र! और........काजल स...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, फैज़ाबाद, उ.प्र. की एक घटना!

उधर सरपंच, रोज ही मिट्टी फांक रहा था, क्या किया जाए? कैसे किया जाए? सामने जाने की हिम्मत थी नहीं, बात बने तो बने कैसे! कोई पल न जाए जब नयना का रूप उसे...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, शालोम की वो एक अवंग-साधिका!

"लोना!" कहा मैंने,"हूँ?" बोली वो, चिपके हुए ही!"मुझे भी इस अमश्च-ध्वांत से रिक्त कर दो!" कहा मैंने,"मैं अग्रगामिनि हूँ अब!" बोली वो,"मुझे द्यौ से तलोन...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, शालोम की वो एक अवंग-साधिका!

मैंने तभी, गला छोड़ दिया उसका! अब मैं जान रहा था! संशय अब, सच में बदलने लगा था! मैंने, उसको, नहीं रोका अब किसी भी मंसूबे से! देखना चाहता था कि लोना कित...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, फैज़ाबाद, उ.प्र. की एक घटना!

उधर सरपंच, रोज ही मिट्टी फांक रहा था, क्या किया जाए? कैसे किया जाए? सामने जाने की हिम्मत थी नहीं, बात बने तो बने कैसे! कोई पल न जाए जब नयना का रूप उसे...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, शालोम की वो एक अवंग-साधिका!

"समय नहीं चुकता!" बोली वो,"चुकता ही तो है!" कहा मैंने,"ऐसा मानना ही तो है?" बोली वो,"किसका, लोना?" पूछा मैंने,"आपका तो नहीं कहा मैंने?" बोली वो,कभी आप...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, फैज़ाबाद, उ.प्र. की एक घटना!

मैं स्कूटी रोकी उधर! शर्मा जी को ताक़ीद किया कि वो यहीं रहें, अँधेरा है काफी, यदि लौटना चाहें या घाट पर जाना चाहें, तो जा सकते हैं! वो वहीँ रुकेंगे, ऐस...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, शालोम की वो एक अवंग-साधिका!

"वर्तमान!" बोली वो,"हाँ!" कहा मैंने,"हाँ!" सर हिलाया उसने, उसकी चिबुक से टपकता जल, मेरे वक्ष-स्थल पर गिरता तो मैं, जैसे ईंधन की एक बून्द की तरह से, भक...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, फैज़ाबाद, उ.प्र. की एक घटना!

मैं किस को देख रहा था?कोई देवी?या कोई यक्ष-कन्या?ऐसा रूप? मनुष्य में तो हरगिज़ नहीं हो सकता! उज्जवल श्वेत-वस्त्र! उज्जवल-काया, दैदीप्यमान मुख-मंडल!"ए? ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, शालोम की वो एक अवंग-साधिका!

कैसे कर लिया? ये हैरत की बात थी! कम से कम मेरे लिए! कैसे, मैं अपने आप में नहीं रहा? क्यों? भला क्यों? "आओ?" बोली वो,और मैं, जैसे अब उसके नियंत्रण में ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, फैज़ाबाद, उ.प्र. की एक घटना!

उसके नाख़ून से, मेरे कान की झल(कान का निचला भाग), सीधे कान की झल पर, एक छोटी से खरोंच पड़ गयी थी, उसने देखा उसे! उसका खून हटाया! अपने हाथ से साफ़ किया!"ख...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, शालोम की वो एक अवंग-साधिका!

अचानक से, मेरे शरीर पर, जैसे जल के कुछ छींटे से पड़े! ये छींटे ज़्यादा तो नहीं थे, मेरे बंद होंठों के बीच एक बून्द, सीधे नथुने में एक बून्द, आँख की पलक ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, शालोम की वो एक अवंग-साधिका!

अचानक ही, मुझे लगा कि मेरे पीछे कोई है! मैं देखने के लिए मुड़ा, लेकिन कोई नहीं था, शायद अभी भी मैं वहम में ही फंसा था! क्या वो लोना थी? वही लोना? या को...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, फैज़ाबाद, उ.प्र. की एक घटना!

उसने पलट के मुझ को देखा, घूरा! संजीदा हो कर! मेरा हाथ पकड़ा, और अपने दोनों हाथों में, भर लिया! मेरे हाथ को देखा, मेरे हाथ में, उलटी तरफ, जो बाल थे, उनक...

2 years ago
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