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हम जा पहुंचे उन पत्थरों के पास, एक एक करके पत्थर देखे, लेकिन नहीं लगा कि ये सारे पत्थर, यहीं के हैं, लगता था, कि जैसे उन्हें यहां कहीं और से उठा कर ला...
अपलक देखती रही वो उसे! कोल्या, पंखा झलने लगा था, कभी-कभार उसकी तरफ भी झल देता था, ये व्यवहार, उस सुरजा के अन्तःमन पर कहीं चोट कर गया था! उसे जैसे अब, ...
और तभी! तभी सारे पेड़, जैसे हिलना भूल गए! ऐसी भयानक शान्ति वहां, कि बस हमें मात्र अपने श्वासों की आवाज़ ही आये! अब कुछ होने को था! कुछ अकल्पनीय!तभी ठीक ...
वो रात, बाबा अधंग के लिए, चिंता वाली रात ही बनी! कोल्या का सामर्थ्य जानता था वो कुटिल बाबा! ये भी जानता था कि, भले ही कोल्या पर आमने-सामने से वार किया...
वो संभवतः एक महाप्रेत रही होगी! उसका वो व्यवहार, वो प्रकृतिदत्त नैसर्गिक शक्ति आदि, एक महाप्रेत में ही हुआ करती हैं! परन्तु, पल पल, कभी षोडशी और कभी व...
"क्या जाफन के बराबर है?" पूछा सेनझा ने,"हाँ, माना जा सकता है" बोला बाबा,"फिर कैसे होगी?" पूछा बेटे ने,"ऐसे पार नहीं पड़ेगी!" बोला बाबा,"तो फिर?" पूछा ब...
वो कम्पन्न ऐसा था, कि हमारे पाँव ही उखड़ गए थे! वो तो देह पोषित थी अन्यथा, उड़ ही चलते पीछे की तरफ और जा टकराते किसी पेड़ से! और वो मुहाना, अब भरने लगा थ...
देर रात तक हमारा कार्यक्रम चला! खा-पी के टन्न हो गए थे हम! रात करीब ग्यारह बजे हम सो गए थे, सोने से पहले मैंने मसान-घेरा काढ़ दिया था कि कहीं हमारे ऊपर...
तो मित्रगण!तीसरा दिन, खबर आ गयी थी कोल्या के पास, खोजबीन, बड़े पैमाने पर हुई थी, मुखबरी की गयी थी, और जो उनके मुखबिर थे, वो सभी भरोसे वाले थे! वो खुद ह...
मैंने आसपास निगाह दौड़ाई! ये सच में एक उजाड़ क्षेत्र ही था, लेकिन आसपास जहां भी ये निर्माण -कार्य चल रहा था, वहां , किसी और के साथ ऐसी समस्या नहीं आई थी...
"इस सोम को?" पूछा कोल्या ने,"जी!" बोला हलकारा,"ठीक है, बोला देना केदार को, कि हम पहुँच जाएंगे उधर, दोपहर समय, यदि केदार नहीं मिला, तो उस से कहना कि अब...
प्रेत, पिशाचों के सामने कहीं नहीं ठहरते! महाप्रेत भी सामना नहीं कर सकते! कुछ समानता अवश्य ही इनमे, महाप्रेत, कुछ समय के लिए, स्थूल-तत्व संजो सकता है! ...
और वो कोल्या, डूबा पुराने वक़्त में! उसकी त्यौरियां चढ़ गयीं! क्रोध के मारे कांपने लगा! मुंह से, हुंकारें निकलने लगीं! क्रोध ऐसा की, सामने उसके कोई भी आ...
तो भोजन आ गया था, साथ में पूरा इंतज़ाम करके लाये थे नरेंद्र साहब, उनके बड़े भाई अब घर चले गए थे, उनकी पत्नी का स्वास्थ्य ज़रा गड़बड़ाया हुआ था, तो हमने भोज...
उस समय, कोल्या का व्यवहार क्रोधपूर्ण नहीं था, वो सामान्य तौर पर ही व्यवहार कर रहा था, ये मेरे लिए बहुत बढ़िया बात थी, अगर वो क्रोध करता, तो बात बिलकुल ...
