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"कौलिया?" चिल्लाया मैं!और फिर हंसा! गाल फाड़-फाड़ हंसा!झोंका अलख में ईंधन!अलख लपलपाई! चौड़ा मुंह खोला उसने!"संगी?" बोला मैं,"आदेश?" बोले वो,"ईंधन झोंक सं...
सबकुछ ऐसा उलझा हुआ था, कि क्या कहूँ? मकड़जाल शब्द भी छोटा पड़ जाएगा! हाँ, लखनऊ के बड़े इमामबाड़े की तरह की भूल-भुलैया जैसा था ये! कहाँ से चले हो, नहीं पता...
अब मैं चाहता था कि एक बार, एक बार उस हरंग लोचना के पास मेरा कोई संदेश पहुँच जाए! लेकिन वहां तो अभी भी उस हरंग के ही सेवक आ रहे थे! सेवक भी ऐसे, जो सेव...
उसने मुझे, मेरी छाती के नीचे, हाथ डालकर, उठाया, पलट दिया, मैं तो उसका स्वरुप देख कर ही दंग रहा गया था! कैसा अनुपम रूप था उसका! अब था, या नहीं था, मैं ...
पढ़ा दिया था मंत्र, उठा कर त्रिशूल, काट दिया उसका मार्ग! जैसे ही कटा उसका मार्ग, वो दूर उछल पड़ा! जैसे उतरा हो किसी सीढ़ी से, ऐसे हो गया खड़ा! और अब देखे ...
ये स्थान उराक्ष-दग्ध था! यहां तो किसी की भी न चलती! न ही किसी ब्रह्म-पिशाच की और न ही किसी ब्रह्म-राक्षस की! इस अर्थ क्या था? किसी ओर इशारा था? यही, क...
वे सब अपने घोड़ों पर सवार हो चुके थे! अपनी अपनी तलवारें, निकाल ली थीं म्यान से बाहर! वे सब जानते थे इसका हश्र! लेकिन ऐसे ही हथियार नहीं डालना चाहते थे ...
मेरी तो जान पर बन आई थी! करूँ तो क्या करूँ? समझ ही नहीं आ रहा था! और तभी नीचे गिरा मैं! कमर में चोट लगी! मुझे तो अब तक सबकुछ घूमता सा लग रहा था! साँसे...
"हरंग लोचना का स्थान है ये!" कहा मैंने,"हरंग?" पूछा उन्होंने,"हाँ, हरंग!" बोला मैं,"इसका क्या अर्थ हुआ?" पूछा उन्होंने,"ऐसा महासाधक, जिसने कभी पीछे मु...
इस तरह, कोल्या ने, वो धन निकाल दिया था! अब धन का हिस्सा आदि, टेपा के ज़िम्मे था! कोल्या धन का आधा भाग, दान चढ़ा दिया करता था! और आधा, रख दिया करता था! ल...
वो पैशाचिक महासुंदरी, चली आ रही थी, नग्न-देह, आभूषण धारण किये, पुष्प-माला पड़ी थी देह के कोने कोने में! ये पुष्प अराः के हुआ करते हैं, इनका रंग, काला औ...
और इस तरह, वो सभी जा पहुंचे अपने स्थान पर! कोल्या एक ऊँचे से पत्थर पर खड़ा था, उसको सभी ने हाथ जोड़, प्रणाम किया! उतरा नीचे कोल्या! और चला अपने कक्ष की ...
मदिरा, कंठ के नीचे उतरी! रोम रोम में जैसे शक्ति का अंकुरण हो गया! अब बुद्धि और विवेक, साथ मिलकर, त्वरित निर्णय लेने हेतु, तत्पर हो गए थे! अब वो साधक ह...
अगले दिन, सुबह सुबह, पूजन पूर्ण किया कोल्या ने, और टीका-करण किया उन छह लोगों का, जो आज जा रहे थे, अपने शत्रु अधंग के पास! बाबा पुरना और उसके बेटे सेनझ...
