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बहुत सी बातें हुईं, कुछ अंतरंग भी और कुछ भिन्न भिन्न विषयों पर, उसके बाद मैं सो गया था, शोभना अपने किसी काम से नीचे चली गयी थी, करीब पांच बजे नींद खुल...
मैंने एक नज़र उसे देखा, और फिर उठ खड़ा हुआ! अपने सामान तक गया और कुछ वस्तुएं निकाल लीं, एक मदिरा की बोतल, दो पात्र, एक सिंघी, एक चीड़ी और कुछ जलावन सा! य...
"जानती हूँ!" बोली वो,"और कल्पशिखा से बातें हुईं?" पूछा मैंने,"हाँ, होती रहती हैं!" बोली वो,"ठीक है?" पूछा मैंने,"हाँ, पिछले महीने आई थी मिलने!" बोली व...
मुझे अगले दिन जाना था किसी से मिलने, एक बुज़ुर्ग बाबा हैं, बाबा हरदेव, उन्ही से मिलने जाना था, कोई छह महीने पहले उनसे मुलाक़ात हुई थी, उनके बाएं हिस्से ...
थाल निकाल कर, अपनी सूती धोती से पोंछ लिया, ऐसा करते हुए, उसके केश बार बार सामने माथे से होते हुए, गिर जाते थे, वो सम्भालती और झटके से देती अपने केशों ...
अब मुझे रक्षण करना था! सबसे पहले तो उस रिपुना का, मेरा और शर्मा जी का तो वो, खैर, क्या बिगाड़ता! हाँ, रिपुना की सबसे कमज़ोर कड़ी थी और उसका रक्षण ही मेरे...
शहरयार जी मिले, और मैं अब पूर्ण रूप से तैयार था! मेरी प्रथम रात्रि की साधिका आ चुकी थी, बस देर थी तो उस साधिका से मिलने की! और तदोपरान्त मुझे उसको साथ...
"अरा? क्या कर रहे हो?" बोले शर्मा जी उनसे, करीब जा कर!सकपका गए वे पाँचों! ये कौन है? किसलिए पूछा? क्या वजह है! घबरा गए थे वे पाँचों के पाँचों!"क्या कर...
"अच्छा!" बोले वो,"हाँ, संध्या समय यहां आएंगे, तब सीधे ही चल पड़ेंगे, ठीक?" कहा मैंने,"हाँ, ठीक!" बोले वो,अब ली सवारी और हुए वापिस, अंदर आये, भोजन की पू...
जा पहुंचे अवधूत के ठिकाने पर! पता चला, साल भर बीता उनको पूरा हुए हुए! बीमार तो नहीं हुए थे, सोये और फिर सुबह उठे ही नहीं! अब भला ऐसी मृत्यु कौन न चाहे...
उसने दो बार इधर-उधर देखा! जैसे कोई चूक हुई हो उसे से, कुछ बोलने में, या जैसे कहना कुछ और चाहता हो और कह कुछ और गया हो!"क्या कहा इसने?'' पूछा नेतराज से...
"ये कौन सी जगह है?" बोले वो,"ये विशेष स्थान हुआ करता है, इसको मसान-स्थल कहा जाता है!" कहा मैंने,"ओह! तो यहां ये क्रियायों का संचालन होता है!" बोले वो,...
"नेतराज?" कहा मैंने,"हाँ?" बोला वो,"इसको समझाओ?" कहा मैंने,"मैंने जो सुना, उसमे तो गलती तुम्हारी ही है!" बोला वो,जी में तो आया हाथ से ऐसी थाप दूँ कि इ...
तो हमारी महफ़िल सजती रही! देर रात हुई और बहुत सी बातें! बाबा ने मुझे और कुछ भी बताया, जो मेरे काम शर्तिया ही आता! आखिर बाबा ने, मुझे इस लायक़ तो समझा ही...
अगला दिन, हम तैयार हुए, उसके बाद फिर हम रिपुना को द्केहने गए, उसकी स्थिति अब बिगड़ तो नहीं रही थी लेकिन कोई सुधार भी नहीं दिखा रहा था, वो बस शून्य में ...
