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"समझा?'' बोली वो,"हाँ, एक एक शब्द!" कहा मैंने,"फिर?" बोली वो,"सोपान दीखता है मुझे!" कहा मैंने,"अवश्य!" बोली वो,"आशीष!" कहा मैंने,"जो, हारकण्ठी?" बोली ...
वो हांफने लगा था! कांपने लगा था! दम्भ का मारा था! दम्भ उफान पर चढ़ा था! ज्वार-भाटे के एतरह, सागर हिलोर मार रहा था! उसकी आँखों में खून उतरा हुआ था! बस च...
"साधिके?" कहा मैंने,"जजर?" बोली वो,"हाँ!" कहा मैंने,"मेरा?" बोली वो,"हाँ! तेरा!" कहा मैंने,जजर, मायने, याचिका-कर्ता! याचना ही तो थी ये! एक अलग प्रकार ...
पानी ले आई वो, हालांकि मुझे प्यास न थी, लेकिन फिर भी, पानी पी ही लिया! ताकि कुछ तो विराम मिले!"अब सुनो?" बोला मैं,"जी?" बोली वो,"तैयार रहिएगा जी, कल क...
मिथांगी! मसान-गणिका! इसका ही आधिपत्य रहता है, समस्त काम-क्रिया पर श्मशान में! क्रिया से पूर्व, इसका आह्वान आवश्यक होता है, अन्यथा वो क्रिया पूर्ण नहीं...
हम ऊपर आ गए थे, एक कमरे में, मैं अंदर जा बैठा था, रिपुना सतह ही बैठ गयी थी मेरे,"पानी?" पूछा उसने,"हाँ, कहने ही वाला था मैं!" बोला मैं,"अभी लायी!" बोल...
शक्ति, प्रधान होती है! और शैव से जब उसका मिलन होता है, तब शिव का उत्सर्जन होता है! शक्ति का ह्रास नहीं होता! ऋण, कदापि अनावेशित नहीं होता! जिस प्रकार,...
चाय खत्म हुई, वे उठे फिर,''अच्छा नेतराज, मैं बात करके, तुझे कॉल करता हूँ फिर!" कहा मैंने,"हाँ कर देना" बोला वो,"ये तेरा ही नंबर है न?'' पूछा मैंने,"हा...
मैं उठा और उस तक जा पहुंचा! उसका चेहरा लाल हुआ पड़ा था, तमतमा गया था, सम्भव है मदिरापान से ऐसा हुआ था! होंठ गीले हो रहे थे उसके! उसके बदन के रोएं अब खड़...
"अब जा नेतराज!" कहा मैंने,"ये तो कोई बात न हुई?'' बोला वो,"देख, होगी भी नहीं!" कहा मैंने,"मेरा तो प्रयास था कि कोई बीच का रास्ता निकले?'' बोला वो, टोप...
काम-वेग! हाँ! यही! यही तो भड़क रहा था मैं इस प्रबल साधना द्वारा! यही उद्देश्य तो था मेरा! मुझे साधिका संग, संसर्ग करना था, उसका स्खलन आवश्यक था, तदोपरा...
मुझे कहीं न कहीं ये आभास तो था कि ऐसा कुछ न कुछ तो होगा ही, या तो मध्यस्थता होगी, कोई मार्ग निकल जाएगा, कुछ समाधान हाथ लगेगा, या फिर अंत में मात्र द्व...
"जा रँगना!" कहा मैंने,"ऊं हूँ!" बोली वो,"जा!" कहा मैंने,"हूँ!" बोली और बोलते हुए, ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी! झटके से खाये कन्धों में, और रँगना छोड़ चली उसे!...
सोने से पहले, फ़ोन आया शोभना का, उसे बता दिया कि हम रात साढ़े नौ ही पहुँच गए थे, मौसम खराब था इसीलिए ज़रा देर हुई फ़ोन करने में! उसके बाद फिर रिपुना का हा...
हम दोनों ही उठ खड़े हुए थे, बाबा टेक क़दमों से उधर चलते आ रहे थे, बायीं बगल के बीच कुछ फंसा रखा था उन्होंने, अभी तो नहीं देख पा रहा था, लेकिन पता तो चल ...
