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"शायद!" बोला वो,"उस रोज क्या वक़्त मुक़र्रर किया था आप तीनों ने, क्या मंसूबा था?" पूछा मैंने,"उस रोज? दिन का वक़्त रखा गया था, दोपहर का" बोला वो,"और कहाँ...
पता नहीं आगे क्या होने वाला था! कहीं हमें कोई दुश्मन ही न समझ ले वो! वे दोनों वहां उसे नहीं मिले थे, कहीं ऐसा न हो कि वो हमें साजिश रचने वाला ही न समझ...
सात बजे.............और अब हम, और मुस्तैद! चौकस और निगाहें सामने ही रखते हुए! अब वो किसी भी पल आ सकता था! और हमसे कोई चूक न हो इसके लिए हम पूरी तरह से ...
और कुछ ही देर बाद, वो तख्ती फिर से काली पड़ने लगी! और धीरे धीरे काली पड़ती चली गयी! पेशी पूरी हुई! अब वो मिठाई और मीठी खील, बाँट देनी थीं बालकों में! अश...
तो हम उस रास्ते पर आगे बढ़ते चले गए थे, रास्ता था तो जानलेवा ही! लेकिन जाना भी था सो चलते चले गए! करीब चालीस मिनट के बाद, हमें सामने नज़र आने लगा वो गाँ...
हम चल पड़े थे नदीम के पास, नदीम, हमें देख, आगे आने लगा था, और हम मिले फिर एक दूसरे से, नदीम ने शर्मा जी को ही देखा सबसे पहले! और तब, शर्मा जी ने, नदीम ...
अब वो काला-ज़ीरा कहाँ था, ये घूम-घाम कर नहीं पता चल सकता था! वहाँ भी हो सकता था, लेकिन कहाँ, ये नहीं मालूम था! और वो जगह तो बहुत बड़ी थी! पूरा महीना लग...
उसी रात, करीब एक बजे, मैं अपने क्रिया-स्थल में गया, सामान-सामग्री आदि पहले ही लगा दी थी, अलख उठायी मैंने, अलखनाद किया! भोग सम्मुख रखा! फिर जा बैठा मैं...
और फिर बज गए साढ़े सात से भी ऊपर! अब तक तो कुछ ही आभास नहीं हुआ, न ही कोई आया और न ही कोई गया, हम वहीँ बैठे बैठे उकताने लगे थे, दो घंटे बिता लिए थे और ...
अगली सुबह का आग़ाज़! देहातों में तो सुबह का आग़ाज़ बेहतरीन ही हुआ करता है! हमारी तरह नहीं, कि कहीं इंजिन चालू हुआ तो कहीं कोई चिल्ला चिल्ला के बोल रहा हो!...
जुम्मे का रोज! इस से भी बड़ी ही मदद मिली! कम से कम ये तो पता चल गया और एक आस भी साथ की साथ बंध गयी कि वो घुड़सवार, हाशिम, उस भाल का दोस्त, जुम्मे वाले र...
पंद्रह-बीस दिन बीत गए होंगे, एक दिन फ़ुरक़ान साहब का फ़ोन आया शर्मा जी के पास, उनकी बातें हुईं उनसे, फ़ुरक़ान साहब को, गाँव की ज़मीन से संबंधित कोई काम था, ...
तो जी दही-बड़े खा लिए, पानी पी लिया, हाथ और मुंह भी साफ़ कर लिए! हम निबटे तो फ़ुरक़ान मियाँ भी निबट गए थे बातों से!"अरे? और मंगवाऊँ?" पूछा उन्होंने,"ना! म...
साढ़े छह! और फिर सात! इतने ही बजे होंगे! हाशिम ने न आना था और न आया ही! शायद, हाशिम किसी हादसे का शिकार हो गया था! कमाल था, वे दोनों, ये बात बखूबी जानत...
सारी रात, आँखों में ही कट गयी, इतनी फिक्र, इतनी चिंताएं, ऐसी आशंकाएं, आज तलक कभी न झेली थीं, तमाम, गुजरी ज़िंदगी में भी, सारी रात, डर, डराता रहा, सारी ...
