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"गुरु जी, अब आप पहले तो ये बताओ, खाना लगाऊं?" बोले अनिल जी,"अभी रुकिए ज़रा!" कहा मैंने,"जी!" बोले वो,"अच्छा गुरु जी?" बोले वो,"हाँ?" कहा मैंने,"अब तक ज...
"क्या? चौदह-पंद्रह साधू?" पूछा शहरयार ने!"हाँ जी, सभी के सभी एक जैसे!" बोले वो,"वस्त्रादि?" पूछा मैंने,"नग्न थे शायद, या लंगोट हो, पता नहीं, भय के मार...
"आएगा समझ भी!" कहा मैंने,"हाँ, अनिल, अब बताओ?" बोले शहरयार!"गुरु जी, जब बारह जगह उन्होंने वो सामान गाड़ा तो पूरी तरह से तैय्यार हो गए थे वो, उनके अनुसा...
"तो गुरु जी, मैं तो चला आया था वहां से, मारे डर के कहीं गिर जाता तो समझो जान चली जाती! मेरी तो इतने में ही हिम्मत टूट गई थी!" बोले अनिल जी,"अच्छा! समझ...
"अच्छा जी! फिर क्या हुआ?" पूछा शहरयार जी ने!''जी रात को तो काम शुरू हुआ!" बोले विनोद जी!"अच्छा!" कहा मैंने,"जी झूठ नहीं कहूंगा, बन्दे में दम तो था!" ब...
"समझता हूँ अनिल! अब गलती हुई, आपने मानी, चलो अच्छा ही हुआ, अरे! तभी तो शेखर साहब ने आपसे मिलने को कहा!" बोले वो,"हाँ जी, धन्य भाग हमारे! नहीं तो अब को...
"हाँ, हाँ! बताइए!" बोले शहरयार जी!"सुनो, ज़रा इसमें डालो यार?" कहा मैंने शहरयार जी से, गिलास देते हुए!"हाँ जी! अभी!" बोले वो,बाहर बारिश की तड़-तड़ हो रही...
"नहीं जी!" बोले वो,"फिर?'' पूछा शहरयार जी ने,"हम सब, एकटक, वहीँ खड़े देखते रहे!" बोले वो,"अच्छा, फिर?" पूछा मैंने,"बार बार ये लगे कि पेड़ के पीछे कोई तो...
"क्या हुआ फिर?" पूछा शहरयार जी ने,"होना क्या था, वो चला गया और कह कर गया कि किसी और को भेजेगा!" बोले वो,"फिर?" पूछा मैंने,"करीब एक महीने बाद, आये दो आ...
"क्या आपने वो जेवर देखा था?" पूछा शहरयार जी ने,"नहीं देख पाये हम!" बोले वो,"हम्म्म! अंदाजा जो लगा रहा हूँ मैं, क्या वो सही है विनोद जी!" कहा मैंने, मु...
"एक रात की बात है, उसकी पत्नी...." चुप हो गए कहते कहते!"मिल गया?" पूछा अनिल जी से, विनोद जी ने,"हाँ, ले आया हूँ!" बोले वो,"कोई लड़का नहीं है?" पूछा उन्...
फिर हमारी मौसम के बिगड़े मिजाज़, आसपास की बातें होने लगीं, फिर, फारिग़ हो गए चाय आदि से, यहां मैं और शहरयार अनिल जी और प्यारे लाल जी से मिलने आये थे, प्य...
"तभी मेरी कुछ चुभा, बहुत तेज, मेरी आँखें मुंद गयीं तभी..और मैं गिर गया नीचे, जैसे ही गिरा, अँधेरा छा गया, लेकिन! मैं उठ खड़ा हुआ! जैसे ही उठा, वहां कोई...
मित्रगण!ज़र्रु का अब इस वाक़ये में आना, इस बात का इशारा करता था कि अब, कुछ ही गिनती की साँसें बची हैं हाशिम के पास! या, थोड़ी ज़्यादा! ज़र्रु, इस वाक़ये में...
