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"एहसान कोई नहीं!" बोले शहरयार!"आप आये, उपकार हुआ" बोला वो,"नहीं, ये तो फ़र्ज़ है हमारा!" बोले शहरयार!"मेरी बेटी की भी तबीयत खराब है, माँ के पास ही थी, उ...
उसे याद ही नहीं था आगे, क्या हुआ था उसके बच्चों का, क्या किया था उस पेड़ ने उनके साथ, कौन आया था मदद को, कोई आया भी था या नहीं? और उन बच्चों का क्या हु...
"बच्चे कहाँ गए हैं?" पूछा मैंने,"सड़क के पास" बोला वो,"क्या उम्र है?" पूछा मैंने,"बच्चों की?" पूछा उसने,"हाँ?" कहा मैंने,"बेटा है, सात का, बेटी है छह क...
"हो कहाँ?" पूछा मैंने,"पीछे आओ" बोला वो,"और कितना पीछे?" पूछा मैंने,"आओ....बचा लो?" बोला वो चीख कर!सच में ही कोई भारी मुसीबत में था, लगता था किसी को घ...
"कोई है?" चिल्लाया मैं भी!"यहां?" आई आवाज़!अब हम दोनों ही चौंके! ये हमारा भ्रम नहीं था! वहां अवश्य ही कोई था! लेकिन था कौन?"कहाँ?" बोले शहरयार,"यहां?" ...
"हाँ" बोले वो,"पत्थर पड़े हैं!" कहा मैंने,"हाँ" कहा उन्होंने,हम चलते रहे आगे!"रुकना?" कहा मैंने,"हाँ?" बोले वो,"उधर देखना?" कहा मैंने,"क्या है?" बोले व...
"आना ज़रा?" कहा मैंने,"चलिए!" बोले वो,हम आगे चले, यहां, कुछ पेड़ थे, कुछ झाड़ियां और कुछ पत्थर से ही!"यहीं देखा था न?" पूछा मैंने,"हाँ!" बोले वो,सर्र!सर्...
मौसम तो बढ़िया था उस दिन, दोपहर तलक, लेकिन शाम चार के बाद, हवा तेज हो गई थी! अब जब हवा, सर्दी में तेज हो, तो फिर तो समझो क़यामत ही टूटी! कमरे की हर झिरी...
"हाँ यहीं ठीक है!" कहा मैंने,"लो जी!" बोले शहरयार जी!"आओ!" कहा मैंने,"चलो जी!" कहा उन्होंने,हम आ गए बाहर, प्रेम जी भी, असरार साहब भी!"आप नहीं आओगे?" प...
तो जी, वे ले आये सामान सारा! पानी भी, गिलास भी और एक बड़ा सा मूंग-दाल का पैकेट भी दे दिया उन्हें!"हाँ जी?" बोले वो,"जी?" कहा मैंने,"लोगे?" बोले वो,"ना!...
सुबह बड़ी ही अलसाई सी थी! मौसम तो साफ़ था, धुंध भी हल्की ही थी, होने लगी थी मेरा मतलब, इसका एक फायदा ये होना था कि दोपहर में शायद मौसम अच्छा रहे! सर्दी ...
तभी सर्द सा झोंका चला! रूह तो हमारी फ़ना होते होते बची! मेरी गरम टोपी के बीच से ही हवा ने जगह बना ली थी! मफ़लर भी ठंड खा गया था, किसी बालक की तरह से पाँ...
गाड़ी आहिस्ता से एक तरफ आ लगी! बाएं ही! यहां तो बीयाबान ही था! सुनसान हर जगह! हाथ को हाथ न सुझाई दे पहली नज़र में तो, लेकिन गहनता से देखो तो समझ आये कि ...
"हाँ, अब गाँव भी खाली ही हैं!" बोले प्रेम जी,''सही कहा, खेती वाले ही रह गए!" बोले सुशील जी,"सब वक़्त वक़्त की बात है!" कहा मैंने,"ये तो है ही!" बोले वो,...
हंसी-हंसोड़ होता रहा! कभी कुछ और कभी कुछ! खाते-पीते रहे हम! सामान गरम था कुछ, कुछ गरम करवा लिया था, ग्रेवी वाल सामान जल्दी ही ठंडा हो जाता था! वही बार ...
