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"हाँ जी, सुनिए सुनिए!" बोले प्रेम जी!"देखि लै! जाट मुनादी कर रौ है!" बोले वो!"हाँ जी, मुनादी!" बोले वो,"किस बात की?" मैंने भी टांग अड़ाई अपनी!"दोहा आने...
"बताओ जी?" बोले सुशील जी!"बता रौ हूँ!" बोले वो,"भूर गए का?" बोले सुशील जी!"थम तौ जा!" बोले वो,"हाँ जी!" बोले शहरयार!"फरौ में आम! सबजी में आरु! औरतन मे...
बातें करते करते हम, गुड़गांवा पहुँच गए! प्रेम जी से बातें हो ही रही थीं फ़ोन पर, जगह बता ही दी थी उन्होंने, तो वो भी मिल गए! उनको साथ ले लिया था, तब हमन...
"लिटा तो देय मोए?" बोले वो,"अभी लो!" बोले वो,थोड़ी-बहुत मेहनत की, और लिटा दिया उन्हें! ऊपर से रजाई डाल दी! उनकी तो हो गई थी शिफ्ट पूरी! बचे थे हम अब! ह...
किसी तरह से नरोत्तम जी के हाथ जोड़, पाँव पड़, उन्हें मनाया उन लोगों ने! बड़ी मुश्किल से माने जी वो! उठ उठ के भागें, एक एक की खिंचाई करें! पता नहीं कब कब ...
"रै सुसील?" बोले वो,"जी?'' बोले वो,"फेर?" बोले वो,"फिर क्या, हम तो दौड़ लिए!" बोले वो,"है जा!" बोले नरोत्तम जी, डकार लेते हुए!"और क्या करते?" पूछा उन्ह...
"लेकिन कैसे?" पूछा उन्होंने,"ये ही तो प्रेत-माया है!" कहा मैंने,"अब हम क्या जानें!" बोले वो,"मैं बता रहा हूँ!" कहा मैंने,"जी!" बोले वो,"तो वे अभी भी व...
"फिर जी, जो हुआ, उसको देख हम तो बेहोश होते होते बचे!" बोले वो,"हैं?" बोले प्रेम जी,"ऐसा क्या देखा?" पूछा मैंने,"रे कहा देख लियौ?" बोले नरोत्तम जी,"ऐसा...
अब जी तरह से वो शराब, हलक़ के नीचे ली हमने, बस हम ही जानें और ये भी अपने आप में एक जौहर ही था! प्रेम जी के मुंह से तो पिचकारी छूट पड़ी थी! उन्होंने बात ...
उनको एक पैग दिया गया! बड़ा सा पैग! एक ही झटके में गिलास का तालू नज़र आ गया! अपनी मूंछों पर हाथ फेरा तब उन्होंने!"बसंती पैग!" बोले वो,"बसंती?'' पूछा शहरय...
"ये क्या हो रहा है?" पूछा उन्होंने,"जैसे ज़मीन में, चट्टानें या पत्थर हिल रहे हों!" कहा मैंने,"कहीं धसके ही नहीं?" बोले वो,"एहतियात रखो, ध्यान रखो!" कह...
जिस तरह से, उसने वो चूना या खड़िया मल रखी थी अपने बदन पर, उसका कुछ कुछ ध्यान मुझे आया, ये मेरे या तो देखा हुआ, या, कहीं पढ़ा हुआ, या कहीं और किसी द्वारा...
वे सूराख साफ़ करने लगे वो! पानी डाले जाते और सूराख साफ़ होते चले जाते! ये सुरक्ष पत्थर को भेदकर, बनाए गए थे, ये आरपार थे, आरपार होना और छेद कर, आधा छोड़ ...
"हूँ?" बोला मैं,"हाँ जी?" बोले शहरयार जी!"हो न हो, इस जगह पर पहले भी कार-गुजारी हुई होगी!" कहा मैंने,"सम्भव है!" बोले वो,"कैसी कार-गुजारी?" बोले अनिल ...
