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वहाँ वैसे तो ऐसी कोई जगह थी ही नहीं जहां हम छिप सकें! या ऐसी किसी गुफा, कंदरा या कक्ष में जा सकें, पेड़ थे घने, वही कुछ शरण दें तो दें! खंडहर भी नहीं थ...
हम वहां जा पहुंचे! ये पिंडी थी? यदि थी, तो बड़ी अजीब सी थी! नहीं तो दिखने में, शिव-लिंगम् समान लगती थी! परन्तु कोई चिन्ह नहीं थे, लिंगम के नीचे, योनि-स...
वो दोनों हैरत में पड़ गए थे मेरा जवाब सुनकर! यक़ीन ही न आये! ग़ैर-यक़ीनी में मुझे ही घूरें! शर्मा जी को देखें! पहली बार मेरी किसी बात से उन्हें ऐसी चोट पह...
वो चुप! आगे कुछ न बोले! शून्य में ही ताके!"मोहर सिंह जी?" कहा मैंने,"ह...हाँ?" बोले वो,"क्या देखा था आपने?" पूछा मैंने,"एक साया सा था वो!" बोले वो,"कै...
सामने, वही टेढ़े-मेढ़े से अजीब पेड़ लगे थे, बेरी के पेड़ थे वो, उन्हें कोई देख ले तो दो बात सोचे! या तो उनकी परवरिश ऐसी जगह हुई थी जो जगह या तो कुआं रही ह...
माहौल तनातनी का सा हुए जा रहा था! वो तो अडिग से खड़े थे, पहरेदारों की तरह! खैर, वो उनका फ़र्ज़ था और वो अपनी फ़र्ज़-अदायगी में लगे थे! और यही बेहतर भी था! ...
कुछ क्षण ऐसे ही आगे बढ़े! न वो हिले और न हम! जैसे वो हम पर नज़रें बांधे थे और हम उन पर! एक अजीब सा खेल चल निकला था! वो, पत्थर की तरह से खड़े थे और हम भी,...
खटिया बाहर बिछा ही ली थी, लू का कहर ऐसा था कि छाती में घुसे और खून से कुश्ती कर, उबाल ला उसमे, बाहर निकल जाए! बदन में झुरझुरी सी उठ जाती थी, लू में, अ...
हम दौड़े वहां से! वे कौवे जैसे हमारे पीछे ही पड़ गए थे, वे कठफोड़वे भी! ये बड़ी अजीब सी बात थी! ऐसा पहले कभी न हुआ था, कम से कम मुझे तो याद नहीं! हम आये भ...
वो सफेद रंग का दूधिया सा पत्थर था, जैसा जिप्सम हुआ करता है, ये गढ़ा हुआ भी नहीं था, बस आधा ज़मीन के अंदर धंसा हुआ था, करीब चार फ़ीट का ये पत्थर रहा होगा,...
वो सभी पेड़, काफी पुराने थे, अजीब से रूप में मुड़े हुए थे, नहीं तो बेरी का पेड़ कभी-कभार ही मुड़ता है ऐसे, लेकिन यहां तो सभी मुड़े हुए थे, पत्ते लगभग थे ही...
उदभेद! मित्रगण! जब भी कोई तिलिस्म रचा जाता है, तो एक कच्चा खेल खेल जाता है! उसमे कौन सा किरदार कहाँ रखना है, उसका क्या कार्य है, कहाँ से आरम्भ होना है...
"वो अलाव ही हैं न?" पूछा उन्होंने,"ऐसा ही लगता है!" कहा मैंने,"लेकिन?" बोले वो,"क्या लेकिन?" पूछा मैंने,"वो तो लगता है बहुत दूर हैं?" बोले वो,"हाँ, चल...
तो रात दस बजे का समय निर्धारित हो चुका था, मैंने इस बीच कुछ आवश्यक वस्तुएं रख ली थीं अपने पास, जैसे कि अभिमंत्रित भस्म इत्यादि, इनकी आवश्यकता पड़ सकती ...
"चलिए अभी तो चलते हैं!" कहा मैंने,"चलो" बोले शर्मा जी,हम हुए वापिस, आये गाड़ी तक बैठ गए, सतीश ने सिगरेट बढ़ा दी आगे, मैंने निकाली और लगा ली, छोड़ा धुँआ ख...
