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ज़मीन के नीचे जो कुछ भो हो रहा था, मैं समझ ही रहा था, वो सारा सामान और घरे उतर रहा था, यही होता है, जब कोई ताक़त उस सामान को रोक देती है तो वो सामान नीच...
ये बात तो सही थी, यहां की प्रत्येक वस्तु में रहस्य सिमटा हुआ था, हर वस्तु रहस्य के अन्धकार में लिपटी हुई थी! हम किसी प्रकार से यहां तक आन तो पहुंचे थे...
पहले साधन भले ही न हों, लेकिन उन लोगों ने अपनी ज़िंदगी ही ऐसी बना ली थी कि हम तो कभी दस फी सदी भी न जी सकें उनका! वे पैदल ही पैदल ऐसी दूरी तय कर लेते थ...
हमने आसपास देखा कि उस स्थान पर, यहां वहाँ, ज़मीन के नीचे असंख्य मृद-भांड बिखरे पड़े थे! ये बड़े-बड़े और एक ही कतार में लगा कर, गोल सी स्थिति में रख दिए गए...
"बिलकुल सही कहा आपने!" कहा मैंने,"मुझे शुरू से ही लग रहा था!" बोले वो,"शुरू में ही बता देते!" कहा मैंने,"मैंने सोचा शायद बाद बन जाए, अब कि बात बन जाए!...
अब मैंने सबसे पहले अगरबत्तियां लगाईं, उस स्थान पर, कुल सात जगह, और सात ही फूल रख दिए, ये फूल, न गुलाब के ही और न गैंदे के ही हुआ करते हैं, ये अलग हुआ ...
"सो तो है ही!" बोले वो,"अब चल जाएगा पता!" कहा मैंने,"अरे?" निकला मुंह से उनके!"गठरी गायब?" बोला मैं!"हाँ, देखिये?" बोले वो,"हाँ, इसका मतलब...." कहा मै...
हम रुक गए ठिठक कर! ये प्रेत-लीला था, बिलकुल थी, सभी के साथ होती, लेकिन अलग अलग प्रकार की! हमारे साथ जो हो रही थी, ये तो वीभत्स थी बहुत! हमें जैसे आखिर...
तभी एक आवाज़ सी आई थी, जैसे किसी स्त्री को प्रताड़ित किया गया हो और वो डर कर, घबरा कर, हार-पुकार कर, बुला रही हो किसी को अपनी मदद के लिए! अब ये कहना कि ...
मैं बार बार उनसे बचने की सी जुगत भिड़ाने की लगा था, जैसे चुप हो जाना, मार्ग से हट जाना, उस बिजार को, मांस का टुकड़ा देना, अब ये प्रलोभन कहो या कुछ और, म...
वे हँसते रहे, शायद वे मानते ही नहीं! और भला मानते भी कैसे! मानना तो बस मुझे ही था! इसके बाद, मैंने फ़ौरन ही, डामरी में उस से वार्तालाप किया, जो कुछ इस ...
थोड़ी देर इंतज़ार किया, कहीं फिर से न आ जाए, पांच मिनट के बाद, मैं उतरा और चला उनके पास, वे भी उतर आये थे, आसपास देखा तो कहीं नहीं दिखा, चला गया था वो, ...
"जी!" बोले वो,"मांगल! हाँ! मांगल!" बोलता हुआ, भूमि पर धम्म-धम्म सी चाप करता हुआ, आ रहा था वो! ये बड़ा ही मस्त-मौला सा आदमी रहा होगा! दीन-दुनिया से बेखब...
तब माँ सती को बताया गया कि, नदी की रेत से वे एक पुरुष-लिङ्गाकृति का निर्माण करें, निर्माण पश्चात, उसने श्री शिव का दर्शन करें, हां, वो लिङ्गाकृति ऐसी ...
"तत्पर हो?" पूछा मैंने,"जी!" बोले वो,"आरम्भ करें?" कहा मैंने,"जी, जय श्री भैरव नाथ!" बोले वो,"जय श्री भैरव नाथ!" कहा मैंने,और तब एक टुकड़ा उठाया मांस क...
