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"हाँ, यही है वो स्थल!" कहा मैंने,"अद्भुत! जीता जागता!" बोले वो,"हाँ, ये स्थान किसी सिद्ध का सा स्थान लगता है!" कहा मैंने,"निःसन्देह!" बोले वो,"ये कितन...
बल्लन जैसे कुछ स्मरण कर रहा था! आँखें बंद करता और फिर खोल लेता! हमें देखता, अब भाव उसके चेहरे पर न तो गुस्से के थे और न ही भय के! वो शांत ही था, जवाब ...
"क्या लगता है ये कूप यहीं है?'' पूछा उन्होंने,"हाँ, ठीक यहीं, इसी स्थान पर!" कहा मैंने,"अब कहाँ ढूंढें?" बोले वो,"आवश्यकता ही नहीं!" कहा मैंने,"क्या?"...
मित्रगण? क्या सच में ही शहरयार जी ने कुछ बोला था? उत्तर है, नहीं! नहीं बोला था! तब? तब मुझे ये, दिखाया गया था! वो चमक क्या थी? नहीं जानता! तब वो दृश्य...
खंजर उठा, मैं खड़ा हुआ, और चारों तरफ देखा! आसपास भी, पीछे भी! आकाश को देख, नेत्र बंद किये और एक महाभीषण-मंत्र का जाप करने लगा! जैसे ही मंत्र समाप्त हुआ...
बड़ी ही ख़ौफ़नाक आँखें थीं उसकी! नज़रें बेहद ही खतरनाक! कोई देख ले साधारण तो, समझो देह में वल्ले पड़ने लगें! काँप जाए खड़े खड़े! आँखें, छोटी कर, हमें देख रहा...
और जब तक हमें होश आता, हम सम्भलते, उस साधू की वो उपद्रवी आंधी गुजर चुकी थी! मैं खड़ा हुआ, शहरयार खड़े हुए, मुंह फांकते हुए हम दोनों! मुंह में मिट्टी भर ...
"चढ़ जाओगे?" बोले शर्मा जी,"हाँ, एक मिनट बस!" कहा मैंने,उस शाख को मज़बूती से पकड़ लिया था मैंने, कुछ पत्ते फिसल रहे थे, चिकने थे इसी कारण से, लेकिन फिर प...
टोर्च की रौशनी में, उस जगह पर जो हमने देखा वो तो जैसे सब मिथ्या ही होय, झूठ या माया ही हो! वहां, असंख्य सी अस्थियां बिखरी पड़ी थीं! कपाल आदि सब! जैसे व...
मंजर बड़ा ही वीभत्स था! मारे बदबू के चक्कर आने लगे थे, उस सड़े-गले सर से ऐसी भयानक बदबू उठे, ऐसा तो हो नहीं सकता था, वहाँ अवश्य ही और कुछ भी था, जैसे और...
"हटो! हट जाओ!" चीखा मैं,और वे, हथौड़ा छोड़, ऊपर की तरफ आ गए! नीचे पत्थर में एक दरार पड़ गई थी, ये दरार, करीब दो फ़ीट के दायरे में थी, मैंने उन्हें ऊपर बुल...
हम रुक गए थे! चौंक कर! पता नहीं क्या था वहां? कोई जानवर? या कोई बड़ा सा सांप? वैसे सांप तो ऐसी आवाज़ नहीं निकालता? कोई बड़ी छछूंदर? लेकिन ऐसी आवाज़ निकालन...
वे बोलते रहे और मैं, अपना काम उस जगह पर करता रहा! खबीसों को इबलिस का ही कारिंदा माना जाता रहा है, इसीलिए सिफली इल्मात में इनसे ही काम लिया जाता है! ये...
मैंने कहा उनसे, कहो कि एक टका सा उत्तर दिया था उन्हें, कि वहां नहीं, जहां मैं कहूं अब, वहां खोदो! इसका आशय मैंने आप सभी से पूछा था, लेकिन, किसी ने भी ...
उस सपने तो मेरे जैसे होश ही उड़ा दिए थे! वो दृश्य ऐसा था जैसे कि मैं किसी हरे-भरे प्रदेश के बीचोंबीच, ऊपर, आकाश में स्वच्छ्न्द विचरण कर रहा होऊं! जहां ...
