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वो दृश्य बड़ा ही ख़ौफ़नाक था! करीब पचास मीटर दूर, कुछ मशालें उठी हुईं थीं ऊपर! और जिन्होंने उठा रखा था, वे सब करीब आते जा रहे थे! कम से कम बीस रहे होंगे ...
वहन कोई नहीं था, बस, मेहँदी की गंध! तेज गंध! जैसे तसले भर भर, वहां रखे गए हों! जैसे बड़े बड़े सिलों पर, पीस पीस, मेहँदी तैयार की गयी हो! पहली बार मुझे म...
बड़ी ही हैरत की बात थी! जगह का मूल रूप ही बदल गया था! वैसे रत्ती भर भी बदलाव नहीं था लेकिन जैसे दिशा उलट हो गयी थी! मैं जहाँ से आया था, वहाँ गया नहीं थ...
मैं जैसे होश में नहीं था अपने! जैसे उसके नादों पर, अपना संतुलन खो बैठा था! शर्मा जी भी उसको ही अपलक देखे जा रहे थे! वो कद्दावर था, मज़बूत था! दो के बरा...
तभी हवा चली और दीये की रौशनी टिमटिमा गयी! हाथ से सहारा देना पड़ा उसे! हवा में, एक सर्द सा एहसास था! और एक अजीब सी गंध साथ लायी थी वो हवा! वो गंध जैसे ग...
हाँ, एक अदम्य लालसा! जाग जाती है आगे बढ़ने की! और इस बड़ा प्रोत्साहन और क्या होगा भला! वही प्रदान हुआ था हमें उस क्षण! जैसे हमारे अंदर एक लौ प्रज्ज्वलित...
"कौन है? सामने तो आओ?" कहा मैंने,फिर से एक हल्की सी हंसी! और एक हल्की सी, छिपाने वाली या रोके जाने वाली छींक सी!"सुनो? कौन हो तुम? सामने तो आओ?" कहा म...
वो एक पेचकस ले आये! इस से काम बन जाता, वैसे एक बात तो है, आजकल तो हम वेल्डिंग आदि का प्रयोग किया करते हैं, गैस-वेल्डिंग की और तब जाकर हम धातुओं को जोड़...
वो रुक गया था! उस दीप को देखा, कभी मुझे देखता! और कभी पीछे देखता! मैं उसको जान गया था! जो उसके हाव-भाव थे, मैं जाना गया था उसको! वो अभी तक वही कर रहा ...
वो पत्थर हट गया था, वो पत्थर, रखा ही ऐसे था कि वो हट जाये या खिसक जाये! तो वो पत्थर हट ही गया था और उसके नीचे नज़र आया कुछ! जो नज़र आया, उस से हमारी ऑंख...
"दिन?" मैंने फिर से पूछा,"नहीं पता, तिथि न?" बोले वो,"हाँ, शायद आज, पड़वा है!" कहा मैंने,"चेक करता हूँ!" बोले वो,और मोबाइल फ़ोन निकाल लिया अपना, कैलेंडर...
हम यहां वहां आँखें घुमाए जा रहे थे! कुछ निशान मिले, या कुछ और टुकड़ा आदि, जिस से कम से कम उधर ध्यान तो लगाया जाए! लेकिन यहां तो ऐसा कुछ भी न था, और अग...
तो अब, अब मुझे यहां पर, तांत्रिक-अभिचार का प्रयोग करना था, जगाना था, जो सोये हुए थे, लाना था वापिस, जो गए हुए थे, ढूंढना था, जो खोये हुए थे, जानना था,...
और तब हम अंदर की तरफ चले, यहीं वो जंगल का क्षेत्र था, दिन में हम यहां नहीं आ पाये थे, यहां कांटेदार पेड़, झाड़ियां थीं, दिन में भी यहां से निकलना दूभर ह...
"ज़रा खुलासा करें अब?" बोले वो,"बताता हूँ!" कहा मैंने,"वैसे एक बात पूछूँ?" बोले वो,"हाँ? क्यों नहीं?" कहा मैंने,"बल्लन स्पष्ट भी तो बता सकता था?" पूछा ...
