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कुछ समय बीता! और तोतों का स्थान अब कौवों ने ले लिया! अब वे शुरू हो गए थे! कहिर, वे एक साथ तो नहीं चिल्लाते थे, तोतों ने तो ऐसा हल्ला-गुल्ला मचाया था क...
कोई घंटा बीता, हम आनंद लेते जा रहे थे, हवा में अब ठंडक महसूस होने लगी थी! वादियों में, घाटियों में अक्सर ऐसा ही होता है, कब मौसम का मिजाज़ बदल जाए, कब ...
तो हमने किसी तरह से शाम पकड़ी! शाम भी बड़ी ही सजीली-संवरी सी थी! लालिमा वाली धूप जब पेड़ों की कनखियों से देखती, तो ऐसा प्रतीत होता, जैसे कोई नई-नवेली दुल...
बाबा औला का नामोनिशान तक मिटा दिया गया, ऐसा 'प्रतिशोध' लिया दोपा ने! और दोपा! उसका एक बाजू कट गया था, खेमू रहा नहीं था, कुछ ही समय के बाद, ज़ख्म के सड़ ...
हमने वहां बड़े अजीब से दृश्य देखे! सच में ही अजीब! देखा, ज़मीन से सोते फूट रहे थे, चश्मे! कोई छोटा और कोई बड़ा! पेड़ों के शीर्ष से, पानी की झड़ियाँ फूट रही...
वो धरपकड़ कैसी थी? किस वजह से थी, पता नहीं चला रहा था, बस, ऐसा लग रहा था कि कोई आता है बहुत तेजी से, हमारा रास्ता काटता है और फिर से वापिस हो जाता है, ...
उस वृद्ध ने राह दिखाई और हम आगे चल पड़े! आगे गए, तो जगह जगह अलाव जले हुए थे, लोग ताप रहे थे! वे सब हम, इशारा कर देते आगे के लिए, और हम आगे चल पड़ते, इस ...
कुछ नहीं शेष था वहां! न वो खंडहर! न वो स्थान! जैसे सब मायावी था! सब का सब! हम चौंक पड़े थे, कि ये हम कहाँ आ गए? कहाँ फेंक दिए गए?"क्या हम वहीँ हैं?" पू...
"मेह बंद!" कहा मैंने,"हाँ!" कहा उन्होंने,"आवाज़ इसी की थी!" बोला मैं,"हाँ वो झम्म-झम्म!" कहा उन्होंने,अचानक से हमारे पीछे से आती रौशनी बंद हो गयी! जैसे...
आग तो यहां खूब ही खेल, खेल रही थी! जब से इस जगह घुसे थे, आग से ही पाला पड़ रहा था, अब पेड़ जल कर राख हो चुका था, धुआं उठ रहा था, गरमी फैली थी, कैसी अजीब...
अचानक से किसी के हंसने के से स्वर गूंजे! जैसे कि हमें ही देख कर हंसा हो, स्वर अधिक ऊंचे तो नहीं थे, लेकिन स्पष्ट रूप से सुनाई दिए थे, मैंने और शर्मा ज...
"जाओ! संग जाओ इसके! ये ले जाएगा! ले जाएगा! जय जय रूपा! जय जय ढाकेश्वरी!" ये नाद करते हुए, बाबा ढाकल लौट गए, लौट गए बाहर! जहां से आये थे!और तब सरकते हु...
हम फिर से अंदर चले आये थे, फिर से उसी रास्ते पर चले जहां से वो प्रकाश आ रहा था, आसपास देखा, तो ठीक दायें एक और रास्ता दिखा, शायद अँधेरे में ये रास्ता ...
अब हम उतरे वहाँ से, और अब हमारा गंतव्य था वो कन्दरा, जहाँ सभी प्रश्नों का उत्तर मिल जाना था, ये अंतिम पड़ाव था! वो कन्दरा अधिक दूर नहीं थी, कुछ सौ मीटर...
