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तो अब, वहां जाए बिना कुछ नहीं जाना जा सकता था! बात भी सही है, बिन मरे सुरग न मिलै! तो अब, खटना ही था हमें! अटकलें तो हज़ार लगा लो! ताने-बाने, हज़ार बुन ...
बाबा से चूक हो गयी थी! दो रात वहां बराबर बने रहे, उठाते रहे! यहां उठाने का मतलब है, सिर पकड़ना, अहिरंग भी दौड़ा दिया! अहिरंग एक ऐसा जाल है, तो पकड़ लाता ...
"अरे नहीं शर्मा जी! आप रुको!" कहा मैंने,"इसे ये तो सीखा ही दूँ कि बोला कैसे जाता है, और बहन-बेटी होती क्या है!" बोले वो, और आ गये पास मेरे, मैं उस लाल...
तो मित्रगण!जाना हमारा हो गया था तय! बाबा चंदन चल रहे थे साथ ही, अगर गाँव में न ही रुके तो उनके पास एक स्थान था वहीँ, जहां से कुछ ही किलोमीटर इस गोमती ...
लेकिन? ये लेकिन अब मेरी जान लेने पर आमादा था जैसे! आखिर में, ये तैतिल है कौन? क्यों मदद की थी उसने उन दोनों की? उसने पुत्री बोला था दोनों को, आखिर में...
शान्ति! सन्नाटा! घोर सन्नाटा! मैं, उसके होंठों के हिलने का इंतज़ार करूँ! प्यासा होऊं इतना कि उठा भी न जाए और जल, सामने ही रखा हो! कैसी हालत! सोचिये ज़रा...
वो जो कुछ भी कह रही थी, नहीं लगता था कि बनावट है! उसके शब्दों में, भावों में, सच्चाई झलक रही थी! हो सकता है, ऐसी कोई शक्ति उसके साथ लगातार मौजूद रही ह...
कुछ पल, मैं उसके वही, दीदे देखता रहा, जिनमें अभी कुछ पल पहले, सहजता सी भरी थी! अब वो सहजता, लगभग लोप हो चली थी! उसके दीदों में, जैसे अलख की चौंध और ता...
"बताओ? क्या देखने?" पूछा मैंने,नहीं बोले कुछ! मेरा तो गला सूखे! मुझे तो जैसे, ज़मीन में कहीं पानी का पता तो चला, लेकिन अब निशानदेही न हो! ऐसा हाल था मे...
अब वे औरतें बनावें मुंह और मुझे आवे गुस्सा! एक बार बर्दाश्त किया, दो बार, फिर तो हद ही हो गयी! जाते जाते कुछ टेढ़ा-मेढ़ा मुंह बना, कुछ बकते हुए, वो कुछ ...
हँसते हँसते वो, फिर से संजीदा हो गयी! मेरे होंठ भी सिकुड़ गए! मुझे बार बार यही लग रहा था की वो एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन तीन जीवन एक साथ जिए जा रही है...
ये लड़की या तो किसी की चपेट में थी या फिर, कोई इसके साथ था, हर पल, हर जगह! लेकिन, चपेट थी, तो वो क्या थी? कोई साथ में था, तो वो कौन था? इसको, पत्थरों क...
"बाबा ने रखा!" बोली तपाक से वो!आवाज़ थोड़ी भारी सी थी उसकी, उसमे ठहराव सा था, शायद ये उसकी परिस्थितियों के कारणस्वरूप हुई हो, इसमें कोई नयी बात नहीं थी!...
"पागल?" मेरे मुंह से निकला!"हाँ, पागल!" बोले वो,"मैं, समझा नहीं?" कहा मैंने,"ओहो! अरे ये तो इलाज भी करवा के आई है! पागलखाने की नौबत आ गयी थी! इसको अमर...
हम आ गए वापिस, स्नानादि से निवृत हुए, और फिर चाय आ गयी, दूध की पूछी थी, लेकिन चाय ही ली हमने, बकरी के दूध की चाय थी, बढ़िया बनी थी! जिस बकरी का दूध इस्...
