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मृणा एक मानव-स्त्री थी, ये जानकर तो मैं सकते में आ गया था, भला एक ब्रह्म-पिशाच और एक मानव-स्त्री का क्या झोलनामा? क्या अर्थ? लेकिन, तैतिल ने ये स्वीका...
वो दौड़ते हुए चले गए थे! और वे दौड़ते हुए आये! फावड़ा भी ले आये थे और पानी की एक बोतल भी! पानी मुझे पकड़ा दिया था उन्होंने, ये रात का समय था और रात में प्...
मैं काल-कण्ड से आगे बढ़ता रहा! ये महाप्रत्यक्ष-महामंत्र है! इस मंत्र से, समाधिलीन योगी और साधक भी जाग जाते हैं! साधारण प्रत्यक्ष-मंत्र नहीं चला था यहां...
"चालै! मांगल चालै!" बोला वो फिर से!इस भीमकाय के बारे में मैं क्या कहूं भला! उसका व्यवहार आक्रामक नहीं था, लेकिन सहायक भी नहीं था! वो जो बोल रहा था, उस...
मित्रगण! अब मैंने ये निर्णय ले लिया था कि उस रात, हम दोनों ही वहां होंगे, और अन्य कोई नहीं! न गोमती ही, न वो रूपी और न वे ही दोनों! मेरे मन में कुछ चल...
और अचानक ही, वो उठ बैठी! बैठी तो घुटनों पर! साक्षात यम-प्रकालिका सी प्रतीत होती थी वो! वो अब गुस्से से देख रही थी मुझे! ये तो स्वाभाविक ही था! वो जो ...
"तेतिल?" चीखा वो, उस पेड़ को देख कर!मैंने भी उस पेड़ को देखा, शांत सा पेड़ वो, जैसे सब सुन रहा था!"हा? तेतिल? थू! थू!" दो बार थूका उसने!वो गुस्से में था ...
उस साधू ने कुछ फेंका था, ये मेरे उस चौखण्डे में आ गिरा था, जिसके अंदर मैं और शहरयार साहब थे! जैसे ही वो गिरा, मैंने देखा उसको, ये दिखने में कोई अंगूठी...
"प्रसाद लो!" कहा मैंने,"अवश्य!" बोले वो,उन्होंने भी, अपना मिदरा का गिलास भरा और एक बार में ही कंठ के नीचे उतर लिया!उठाया चिमटा मैंने, उनके सर से, दो ब...
वे नर-मुंड किसके थे? ये कौन सा स्थान है? कहीं कोई डेरा अथवा चल्लक तो नहीं रहा था ये स्थान? इतने नर-मुंड कैसे आ गए यहां? उनके रंग अब बदरंग हो गए थे, इस...
कटे सर दिखाना, कटे धड़ दिखाना, कटे अंग दिखाना ये सब प्रेत-माया है! जिसने प्रेत-साधन किया हो, वो अवश्य ही समझ जाएगा, जिसने नहीं, वो अवश्य ही देह से प्रा...
"जा! चला जा! अग्घड़ सामण न आ!" बोला वो!क्या? ये क्या बोल रहा था वो?अग्घड़? वो अग्घड़ है क्या?अग्घड़ का मतलब हुआ औघड़! उस समय, करीब डेढ़-सौ वर्षों तक, बोली म...
"जय जय श्री रक्तज! जय जय श्री वपुधारक! जय जय श्री मुण्ड माली!" और चिल्ला उठा एक नाद भरते हुए!"जय जय श्री रक्तज!" बोले शहरयार जी!और हम दोनों ने अलख में...
"इतना स्थान बहुत रहेगा?'' बोले वो,"हाँ, बहुत!" कहा मैंने,"तो कब से आरम्भ करेंगे?" बोले वो,"संध्या होते ही!" कहा मैंने,"मतलब, करीब आधे घंटे बाद?" बोले ...
वो कभी हमें देखती, रुक जाती, अपने आँखें खुजाती और फिर आगे बढ़ जाती! जो वो आगे बढ़ती, तो हम भी बढ़ते और जब रुक जाती तो हम भी रुक जाते! नहीं चाहते थे कि उस...
