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उसके अंक-पाश में क़ैद मृणा! मज़बूत भुजाओं में क़ैद! लेकिन इस क़ैद में भी एक आनंद सा था! एक सुखानुभूति सी! जिसे, शायद, शब्दों में नहीं लिखा जा सकता, शब्द त...
वो कहाँ रह गए? कोई नहीं जानता! यहां तक कि यहां जो प्रेत थे, वे भी नहीं! यहां ये कुल चौबीस थे, तो वो पुरुष कौन था? वो तेज वाला? इसका उत्तर दूंगा अभी! प...
"कौन है? सम्मुख तो आओ?" मैंने बड़ी ही हिम्मत से पूछा!"जय मणा!" इस बार जैसे किसी झुण्ड ने बोला ये!"जय मणा!" निकला मेरे मुख से!और तभी मेरे कंधे पर फिर से...
हाय रे ये प्रेम! प्रेम के रंग! प्रेम की घटाएं! घटाओं की छाँव, अन्धकार से अधिक स्याह! और उनसे छँटती धूप, जीया जलाने वाली! न छाँव ही रास आये और न धूप ही...
तो बाहर वाले पर ही जाने का निर्णय हुआ, और हम चल दिए, पूछते-पाछते हमें वो मिल गया, अब यहां से, गए दूसरी जगह, वो भी मिल गई, हालांकि, अभी कुछ अलग सी थी, ...
मित्रगण!छूट चली थी! मृणा, छूट चली थी अपने आप से भी, इस दीन-दुनिया से भी! इस घटना के बाद से तो, मृणा, मृणा न रही, तृणा ही शेष रह गयी थी! तृणा, जिसको मा...
इस तरह हम चलते चलते, पहुंचे जाकर, करीब छह बजे! बड़ा ही शानदार और सुंदर शहर है ये! शहर में घुसते ही आपको पग पग में, इतिहास की गंध आएगी! उसी जगह पर, हमने...
"गुरु जी?" बोले वो,"हाँ?" कहा मैंने,"ये चण्डीधीश क्या हुआ?" पूछ उन्होंने,"इसका अर्थ हुआ कि अवश्य ही उस स्थान पर, कोई चण्डी माँ का मंदिर है, उसी मंदिर ...
भान तो पहले से ही था मृणा को! भान, कि ये सर्प, कोई साधारण सर्प नही है! कोई भी साधारण सर्प ऐसा नहीं होता, ऐसा सम्भव ही नहीं उसके लिए! और ये, ये तो न जा...
कनकी की वस्तुएं? कनकी के माल थे ये? और ये उबक्ष(भस्म) उसकी है? मेरे तो हाथ ही कांपने लगे! क्या हुआ था उस कनकी को? कहाँ गया था वो मांगल? किसलिए गया था?...
सारी रात, गयी आँखों में! करवट बदले, तो नींद खुल जाए, नींद खुले तो मन जंगले में जा छलांग मारे, छलांग मारे तो सामने वही सर्प हो! वही सर्प हो, तो सम्मुख ...
वे सभी आ बैठे थे! सच कहता हूँ, ऐसा मंजर नहीं देखा जा सकता! ये अति-भयावह और सन्न करने वाला था! वो सिवणा, आकर, आगे खड़ा हो गया था, कभी हमें देखता और कभी ...
और अचानक ही, बाबा सल्ला भी लोप हो गए! ये शक्ति-सम्पन्न प्रेत थे, इनमे दूसरे प्रेतों से अधिक सामर्थ्य था, इसमें तो कोई संदेह ही नहीं था! ऐसे कई शक्ति-स...
मृणा के भाई, दौड़ कर, पहुँच गए थे वहां, लाठी-डंडे लेकर! लेकिन जब सर्प को देखा, तो जैसे सांप ही सूंघ गया उन्हने! उस सर्प का आकार विशाल था! उसका रूप जैसे...
"ये सब?" बोले वो,"कहीं ये सब, उस मांगल का तो नहीं?" पूछा मैंने,"यहां तो सब सम्भव है!" बोले वो,"रुको, पीछे हो कर बैठो ज़रा!" कहा मैंने,"जी, ज़रूर!" बोले ...
