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साथ में, वो दोनों भी बैठ गए! अंदर वहाँ, मरुस्थलीय पौधे लगे थे, उनका जीवट साफ़ दीखता था! पानी की अल्पता से कैसे निबटा जाए, उन्होंने दिखा दिया था! उनके प...
"लगता है आज कोई तूफ़ान आएगा!" बोला मै, तौलिया पकड़ते हुए! हवा ऐसी ज़ोरदार कि, खड़े खड़े को, पीछे को फेंके! सांय-सांय की आवाज़ हो! वो धूल-धक्कड़ और वो तूफ़ान, ...
उसके हाथ बेहद सुंदर थे, मेहँदी लगी थी उन पर, हाथों की तीन तीन उँगलियों में, अंगूठियां पहने हुए थी वो! सच में मित्रगण! उसको देख कर, दया का ही भाव आता थ...
कपाल-डिम्बा नहीं प्रकट हुई! कपाल-डिम्बा, श्मशान-सुंदरी हुआ करती है, महामसानी के समकक्ष ही मानी जाती है, परन्तु आयु में, उस से कम हुआ करती है, मारण-कर्...
उस रेत में, मोटरसाइकिल के टायर जवाब देने लगे थे, तो वहीँ खड़ी कर दी उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल, और पैदल ही चल पड़े ढूंढने उसे! पैदल तो, चला ही न जा रहा था...
वो चलते चले गए, लेकिन उनके कानों में अभी तक वो शब्द, वो जगहों के नाम गूंजते रहे! धरणा, खाम मूढ़न आदि, ये नाम तो उन्होंने अपने बाप दादाओं के मुंह से भी ...
तैतिल, खड़ा रहा, जस का तस! आँखें मिलाता हुआ, उस अम्फू से! अम्फू ने जो काट की थी, उस से उसका मनोबल और बढ़ गया था! इसीलिए बड़बोलापन अब सर पर सवार था उसके! ...
"अम्फू?" बोला क्रोध से वो!और अम्फू! गाल बजाए! हँसे!"अच्छा किया तो आ गया! नहीं तो इसकी निशासखी बनाता मैं!" बोला अम्फू!अब क्रोध के मारे हुए लाल वो! नेत्...
उस रात, बाबा ने गुणा-भाग, धन-ऋण सब कर डाला! कहाँ चूक हुई थी, कहाँ गलती हुई थी, सब का हिसाब कर डाला! और अब उसने अति-क्लिष्ट सिद्धियों का प्रयोग करना आव...
उसने जैसे ही मिट्टी को मला, और बोला उसका नाम, मृणा, जो चल कर आ रही थी सखियों के संग, चुप सी खड़ी हो गयी! देखने लगी पीछे, जैसे किसी ने आवाज़ दी हो उसे, प...
अब बाबा और देर करने के पक्ष में नहीं था! उसे तो वही चाहिए था, शीघ्रातिशीघ्र जिसके लिए वो यहां तक आया था! बाबा कहीं सठिया गया हो, ऐसा भी नहीं था, उसकी ...
वाह! क्या चाल खेली थी बाबा अम्फू ने! बाबा अम्फू कच्ची गोटियां चबाने वाला नहीं था! उसने पीरु को भेजा था कि वो जाए और पता करे! जाए, तो कुछ अन्न आदि लेकर...
तो मित्रगण!बाबा अम्फू ने जैसे अब ठान ही ली थी! कि, अब वो लघु-मार्ग अपनाएंगे! उस दिव्य-अंश का क्या रहस्य है, ये जानना आवश्यक था! उन्होंने, केशि को बुला...
उस सुबह कुछ विलम्ब से उठना हो पाया उसका, स्नान-ध्यान से निवृत हो, अपने दैनिक-कलापों में व्यस्त हो गयी, उस रोज तो कहीं मन न लगे उसका! यूँ कहो, कि बस दे...
